


नवगछिया: मिथिलांचल की समृद्ध लोकसंस्कृति और परंपराओं का प्रतीक मधुश्रावणी महापर्व इन दिनों पूरे श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। नवगछिया सहित आसपास के मैथिल परिवारों में इस पर्व की विशेष रौनक देखने को मिल रही है। शुक्रवार को महापर्व के पांचवें दिन नवविवाहिताओं ने विधि-विधान के साथ विशेष पूजा-अर्चना कर अपने पति की दीर्घायु, सुख-समृद्धि तथा अखंड सौभाग्य की कामना की।
मधुश्रावणी पर्व नवविवाहित महिलाओं का प्रमुख लोकपर्व है, जिसे विवाह के बाद प्रथम सावन में मायके में रहकर मनाने की परंपरा है। लगभग दो सप्ताह तक चलने वाले इस पर्व में प्रतिदिन अलग-अलग धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होते हैं। भगवान शिव, माता पार्वती, नाग देवता तथा गौरी की पूजा के साथ लोककथाओं का श्रवण कराया जाता है। इस पर्व के माध्यम से नववधुओं को पारिवारिक जीवन, संस्कार, दांपत्य मर्यादा और लोक परंपराओं का ज्ञान भी कराया जाता है।
नवगछिया के मारवाड़ी धर्मशाला रोड स्थित अपने मायके में पूजा व्रत कर रही नवविवाहिता पूजा कुमारी भी पूरे नियम, संयम और श्रद्धा के साथ मधुश्रावणी व्रत का पालन कर रही हैं। उन्होंने शुक्रवार को पांचवें दिन की पूजा संपन्न की। घर में पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा-अर्चना, कथा श्रवण और मंगल गीतों का आयोजन हुआ। महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में एक-दूसरे को शुभकामनाएं देते हुए पर्व की गरिमा को बनाए रखा।
पूजा कुमारी ने बताया कि मधुश्रावणी केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि मिथिला की सांस्कृतिक पहचान है। इस पर्व के माध्यम से नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं, संस्कारों और पारिवारिक मूल्यों से जुड़ने का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि मायके में परिवार के सभी सदस्यों के साथ यह पर्व मनाना अत्यंत सुखद और सौभाग्य की बात है।
स्थानीय वैदिक विद्वान पंडित ललित शास्त्री ने बताया कि मधुश्रावणी महापर्व का विशेष महत्व नवविवाहिताओं के लिए होता है। इस व्रत में माता गौरी, भगवान शिव तथा नाग देवता की आराधना की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक व्रत और पूजा करने से दांपत्य जीवन सुखमय होता है, परिवार में समृद्धि आती है तथा पति की दीर्घायु का आशीर्वाद प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि यह पर्व केवल धार्मिक आस्था का नहीं, बल्कि मिथिला की हजारों वर्ष पुरानी लोकसंस्कृति और सामाजिक परंपराओं को जीवंत बनाए रखने का भी माध्यम है।

नवगछिया में भी मैथिल समाज के परिवारों द्वारा मधुश्रावणी महापर्व पूरी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। प्रतिदिन होने वाले धार्मिक अनुष्ठानों और लोक परंपराओं के कारण क्षेत्र का वातावरण भक्तिमय बना हुआ है। नवविवाहिताएं पूरे उत्साह के साथ इस महापर्व में भाग लेकर अपनी सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने का संदेश दे रही हैं।















