


@ कुलपति की पहल के बाद रफ्तार पकड़ने लगीं वर्षों से लंबित योजनाएं, रूसा-1 के कार्यों का स्थल निरीक्षण
प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। वर्षों की उपेक्षा और आधारभूत सुविधाओं की कमी से जूझ रहे सबौर महाविद्यालय में अब बदलाव की तस्वीर उभरने लगी है। तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) विमलेन्दु शेखर झा की पहल और लगातार निगरानी के बाद महाविद्यालय में लंबे समय से ठप पड़े विकास कार्यों ने रफ्तार पकड़नी शुरू कर दी है। बीते एक माह में कुलपति के दो बार महाविद्यालय पहुंचने को भी इस बदलाव की अहम कड़ी माना जा रहा है। रूसा-1 के तहत लंबे समय से बंद पड़े कार्यों को दोबारा शुरू किया गया है।
बुधवार को पहुंची विश्वविद्यालय की टीम:
कुलपति के निर्देश पर तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के अभियंता अंजनी कुमार बुधवार को सबौर महाविद्यालय पहुंचे। उन्होंने रूसा-1 के तहत चल रहे निर्माण एवं विकास कार्यों का स्थल निरीक्षण किया। साथ ही महाविद्यालय में लंबित अन्य योजनाओं की भी स्थिति देखी और उनके शीघ्र क्रियान्वयन को लेकर आवश्यक जानकारी जुटाई।
अभियंता ने भरोसा दिलाया कि विश्वविद्यालय स्तर से आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर लंबित विकास कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जाएगा। निरीक्षण के दौरान महाविद्यालय के प्रधानाचार्य प्रो. (डॉ.) संजय कुमार झा, रूसा-1 के प्रोजेक्ट मैनेजर अरबाजुल, बर्सर डॉ. राकेश रंजन, प्रधान सहायक राकेश ठाकुर तथा जनसंपर्क अधिकारी डॉ. मयंक वत्स मौजूद रहे।

प्रधानाचार्य बोले – लक्ष्य सिर्फ भवन नहीं, बेहतर शैक्षणिक माहौल:
प्रधानाचार्य प्रो. (डॉ.) संजय कुमार झा ने कहा कि कुलपति की विशेष संवेदनशीलता और सकारात्मक दृष्टिकोण से महाविद्यालय के विकास कार्यों को नई गति मिली है। उनके निर्देश पर विश्वविद्यालय अभियंता को भेजकर न केवल रूसा-1 के कार्यों, बल्कि अन्य लंबित योजनाओं की भी स्थिति का आकलन कराया गया है।
ठप पड़े कामों में हलचल से बढ़ी उम्मीद:
वर्षों से लंबित योजनाओं के दोबारा गति पकड़ने से महाविद्यालय के शिक्षक और शिक्षकेत्तर कर्मचारी उत्साहित हैं। महाविद्यालय परिवार ने कुलपति प्रो. (डॉ.) विमलेन्दु शेखर झा के प्रति आभार जताते हुए उम्मीद व्यक्त की है कि विश्वविद्यालय प्रशासन की निगरानी और निरंतर पहल से आने वाले दिनों में सबौर महाविद्यालय की तस्वीर और तकदीर – दोनों में व्यापक बदलाव दिखाई देगा।
















