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प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। श्रावणी मेले में कांवड़ पथ पर जहां एक ओर हर-हर महादेव और बोल बम के जयकारे गूंज रहे हैं, वहीं इस बार कुछ अजब-गजब और मजेदार जयकारों ने भी राहगीरों का ध्यान खींच लिया। कांवरियों के बीच इन जयकारों ने माहौल में भक्ति के साथ ठहाकों का रंग भी घोल दिया।
कांवड़ पथ पर करीब आधा दर्जन सहेलियों का एक जत्था पीठ पर जल लेकर बाबा नगरी की ओर बढ़ रहा था। लेकिन उनकी यात्रा की खासियत सिर्फ पैदल चलना नहीं थी – उनके बीच से निकल रहे थे ऐसे जयकारे, जिन्हें सुनकर आसपास चल रहे कांवड़िए भी मुस्कुराए बिना नहीं रह सके। इस मुस्कराहट के साथ चाल में तेजी भी देखने को मिल रही थी।

सभी सहेलियों की टोली कभी उत्साह से WW.COM ‘भोले बाबा बेलकम’ का नारा लगाती तो कभी उनकी आवाज में सुनाई देता – ‘भोले बाबा पत्थर में, पार्वती के चक्कर में…’ इसके बाद जैसे ही एक और मजेदार जयकारा गूंजा – ‘चार चिलम में चार धाम, एक चिलम में बाबा धाम।’
आसपास मौजूद कांवड़ियों के चेहरे पर हंसी तैर गई। खुद जयकारा लगाने वाली सहेलियां भी अपनी हंसी रोक नहीं पा रही थीं। महज जयकारे की अगुआई कर रही सहेली गंभीर थी। भक्ति के साथ मस्ती का तड़का ने सबको अचंभित भी कर रहा था। कांवड़ यात्रा को आमतौर पर कठिन पैदल यात्रा और आस्था से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन इस टोली ने रास्ते के माहौल को थोड़ा हल्का – फुल्का बना दिया। जयकारों के बीच उनकी मस्ती देखकर आसपास चल रहे श्रद्धालु भी कुछ पल के लिए ठहरकर इस अंदाज का आनंद लेते नजर आए।
एक सहेली पूरे घटनाक्रम की रील भी बना रही थी, जिसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लाइव प्रसारित किया जा रहा था। यानी कांवड़ पथ का यह अनोखा अंदाज सिर्फ रास्ते तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सोशल मीडिया की दुनिया तक भी पहुंच गया। आधी दूरी यानी करीब 55 किमी तय करने के वक़्त ही इस वायरल पोस्ट ने करीब तीन लाख व्यू बटोर चुका था।
इन सहेलियों का यह अंदाज कांवड़ पथ पर चर्चा का विषय बना हुआ है। उनकी यात्रा में भक्ति थी, बाबा के प्रति आस्था थी और उसके साथ दोस्तों वाली बेफिक्री भी। कांवड़ पथ पर हजारों कदम बाबा धाम की ओर बढ़ रहे थे, लेकिन इन सहेलियों के जयकारों ने रास्ते में कुछ ऐसे ठहाके जरूर छोड़ दिए, जिन्हें सुनने वाले शायद लंबे समय तक याद रखें।
















