


ज्ञान वाटिका विद्यालय में रक्षाबंधन पर राखी बनाने की प्रतियोगिता, बच्चों की रचनात्मक प्रतिभा ने मोहा मन
नवगछिया। रक्षाबंधन के पावन अवसर पर विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति, पारंपरिक त्योहारों और भाई-बहन के पवित्र रिश्ते से जोड़ने के साथ-साथ उनकी रचनात्मक प्रतिभा को मंच प्रदान करने के उद्देश्य से ज्ञान वाटिका विद्यालय, सिंघिया मकंदपुर, नवगछिया में राखी बनाने की प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। विद्यालय परिसर में आयोजित इस प्रतियोगिता में कक्षा एक से दसवीं तक के छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। बच्चों ने अपनी कल्पना, कलात्मक सोच, मेहनत और सृजनात्मकता को रंग-बिरंगी राखियों के माध्यम से प्रस्तुत किया।

प्रतियोगिता के दौरान विद्यालय परिसर में उत्साह और उमंग का माहौल रहा। विद्यार्थियों ने विभिन्न रंगों के धागे, मोती, रिबन, सजावटी सामग्री सहित अन्य वस्तुओं का उपयोग कर आकर्षक एवं रचनात्मक राखियां तैयार कीं। किसी ने पारंपरिक डिजाइन को प्राथमिकता दी तो किसी ने अपनी कल्पना के आधार पर राखी को नया रूप दिया। बच्चों की बनाई राखियों में उनकी उम्र के अनुरूप कल्पनाशीलता और कला की झलक देखने को मिली।
प्रतियोगिता का आयोजन रणवीर सर एवं समीक्षा संगम के संरक्षण में किया गया। आयोजन को सफल बनाने में विद्यालय के प्राचार्य राजेश कुमार झा सहित अमर कुमार झा, राहुल सिंह, सर्वेश चौधरी, मनोज कुमार, सुमन गुप्ता, विवेक गुप्ता, अवधेश सर, रूपेश सर, पिंकू सर एवं विद्यालय के सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं का भरपूर सहयोग रहा।
प्रतियोगिता में विद्यार्थियों की रचनात्मकता, कलात्मकता, मौलिकता और आकर्षक प्रस्तुति को विशेष महत्व दिया गया। मूल्यांकन के लिए कुल 60 अंक निर्धारित किए गए थे। प्रतियोगिता को निष्पक्ष एवं पारदर्शी बनाने के लिए विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाओं को निर्णायक मंडल में शामिल किया गया। निर्णायक मंडल ने विद्यार्थियों द्वारा तैयार की गई राखियों का निर्धारित मानकों के आधार पर बारीकी से मूल्यांकन किया।

प्रतियोगिता में कक्षा 9 की छात्रा ने प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि कक्षा 3 की छात्रा ने द्वितीय तथा कक्षा 5 के छात्र ने तृतीय स्थान हासिल किया। विजेता प्रतिभागियों को विद्यालय प्रशासन की ओर से उपहार प्रदान कर सम्मानित किया गया। साथ ही अन्य प्रतिभागियों की भी मेहनत और रचनात्मकता की सराहना की गई। विद्यालय की ओर से बच्चों को यह संदेश दिया गया कि किसी प्रतियोगिता में पुरस्कार प्राप्त करना ही सफलता का एकमात्र मापदंड नहीं है, बल्कि पूरे उत्साह के साथ भाग लेना, नई चीज सीखना और अपनी प्रतिभा को सामने लाना भी महत्वपूर्ण है।
प्राचार्य राजेश कुमार झा ने कहा कि रक्षाबंधन का अवसर केवल राखी बांधने या राखी बनाने की प्रतियोगिता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सृजनात्मकता, संवेदनशीलता और रिश्तों की सुंदरता को समझने का भी अवसर है। उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि राखी केवल एक धागा नहीं है, बल्कि यह प्रेम, विश्वास, अपनापन और जिम्मेदारी का प्रतीक है। जब कोई बच्चा अपने हाथों से राखी तैयार करता है तो उसमें उसकी कल्पना, मेहनत और भावनाएं भी जुड़ जाती हैं।
उन्होंने कहा कि प्रतियोगिता में सबसे सुंदर राखी वही नहीं होगी जो केवल देखने में आकर्षक हो, बल्कि वह भी महत्वपूर्ण होगी जिसमें नई सोच, मौलिकता और भावनाओं की सुंदर अभिव्यक्ति दिखाई दे। उन्होंने संस्कृत के कथन ‘सृजनं मानवस्य भूषणम्’ का उल्लेख करते हुए कहा कि सृजनशीलता मनुष्य का आभूषण है।
प्राचार्य ने बच्चों का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि प्रत्येक बच्चे के अंदर कोई न कोई विशेष प्रतिभा छिपी होती है। आवश्यकता केवल उसे पहचानने और उचित अवसर देने की है। इसलिए विद्यार्थियों को प्रतियोगिताओं को केवल जीतने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि कुछ नया सीखने और अपनी कल्पना को आकार देने के अवसर के रूप में लेना चाहिए।
राजेश कुमार झा ने कहा कि राखी हमें यह भी संदेश देती है कि रिश्ते केवल शब्दों से नहीं, बल्कि विश्वास, सम्मान और जिम्मेदारी से मजबूत होते हैं। भाई-बहन का रिश्ता हो या शिक्षक और विद्यार्थी का संबंध, हर रिश्ते में प्रेम और विश्वास का धागा आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों को मेहनत और लगन के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि अपनी कल्पना को कभी छोटा नहीं समझना चाहिए। आज कागज, धागे और रंगों से बनाई गई छोटी-सी राखी भविष्य में बड़ी रचनात्मक क्षमता का आधार बन सकती है।
उन्होंने शिक्षकों की भूमिका पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि बच्चों को केवल प्रतियोगिता में शामिल करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी कल्पना को उड़ान देने का अवसर देना भी जरूरी है। शिक्षक का सबसे सुंदर कार्य यही है कि वह बच्चे के भीतर छिपी प्रतिभा को पहचानकर उसे आगे बढ़ने का विश्वास प्रदान करे। उन्होंने ‘विद्या ददाति विनयं, विनयाद् याति पात्रताम्’ का उल्लेख करते हुए कहा कि विद्या व्यक्ति में विनम्रता लाती है और विनम्रता से योग्यता का विकास होता है।
कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों ने भी बच्चों का उत्साहवर्धन किया। विद्यालय के शिक्षक अमर कुमार झा, राहुल सिंह, सर्वेश चौधरी, मनोज कुमार, सुमन गुप्ता, विवेक गुप्ता, अवधेश सर, रूपेश सर और पिंकू सर सहित अन्य शिक्षकों ने विद्यार्थियों द्वारा तैयार की गई राखियों का अवलोकन किया और उनकी रचनात्मकता की सराहना की। शिक्षकों ने कहा कि बच्चों की प्रतिभा को निखारने के लिए पढ़ाई के साथ ऐसी गतिविधियों का आयोजन बेहद उपयोगी है।
रणवीर सर ने कहा कि बच्चों में रचनात्मक क्षमता की कोई कमी नहीं होती, जरूरत केवल उन्हें अपनी कल्पना को व्यक्त करने का अवसर देने की है। राखी बनाने की प्रतियोगिता के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी सोच को रचनात्मक रूप देने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि प्रतियोगिता में बच्चों की भागीदारी और उत्साह आयोजन की सफलता को दर्शाता है।
समीक्षा संगम ने कहा कि रक्षाबंधन प्रेम, स्नेह और विश्वास का पर्व है। इस अवसर पर राखी बनाने की प्रतियोगिता आयोजित करने का उद्देश्य विद्यार्थियों को त्योहार की भावनात्मक और सांस्कृतिक महत्ता से जोड़ने के साथ-साथ उनकी रचनात्मक प्रतिभा को सामने लाना भी था। उन्होंने कहा कि बच्चों ने पूरी लगन और उत्साह के साथ प्रतियोगिता में हिस्सा लिया तथा अपनी कल्पना को सुंदर राखियों के रूप में प्रस्तुत किया।
विद्यालय के शिक्षकों ने कहा कि इस तरह की गतिविधियों से बच्चों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित होती है। साथ ही उनमें एकाग्रता, धैर्य, कल्पनाशीलता, कलात्मकता और आत्मविश्वास का विकास होता है। बच्चों को जब अपनी पसंद और सोच के अनुसार कुछ बनाने का अवसर मिलता है तो उनकी छिपी हुई प्रतिभा सामने आती है। विद्यालय का प्रयास है कि विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ-साथ ऐसे अवसर भी उपलब्ध कराए जाएं, जिससे उनका सर्वांगीण विकास हो सके।
कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने न केवल राखियां तैयार कीं, बल्कि एक-दूसरे की रचनात्मकता को भी देखा और उससे सीखने का प्रयास किया। प्रतियोगिता ने विद्यार्थियों के बीच सहयोग, उत्साह और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना को भी बढ़ावा दिया। शिक्षकों ने बच्चों को समझाया कि किसी भी प्रतियोगिता में परिणाम से अधिक महत्वपूर्ण प्रयास, सीख और अनुभव होता है।
कार्यक्रम के समापन पर प्राचार्य राजेश कुमार झा ने सभी प्रतिभागियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि पुरस्कार किसी एक या कुछ विद्यार्थियों को मिल सकता है, लेकिन प्रतियोगिता से मिलने वाली सीख और अनुभव प्रत्येक बच्चे के साथ आगे बढ़ता है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी प्रतिभा पर विश्वास रखने और हर अवसर का सकारात्मक उपयोग करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि बच्चों की कल्पना रंगों की तरह सुंदर हो, उनकी सोच राखी के धागे की तरह मजबूत हो और उनके रिश्ते हमेशा प्रेम एवं विश्वास से जुड़े रहें। उन्होंने सभी विद्यार्थियों, शिक्षकों और विद्यालय परिवार को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दीं।
ज्ञान वाटिका विद्यालय में आयोजित यह प्रतियोगिता विद्यार्थियों के लिए मनोरंजन और प्रतिस्पर्धा के साथ सीखने का भी अवसर बनी। रक्षाबंधन की भावना, भारतीय संस्कृति, रिश्तों की महत्ता और रचनात्मकता को एक साथ जोड़ने वाली इस गतिविधि में बच्चों ने जिस उत्साह के साथ भाग लिया, उससे विद्यालय परिसर में पर्व का माहौल और भी जीवंत हो गया। विद्यालय प्रशासन ने सभी प्रतिभागियों के प्रयासों की सराहना करते हुए भविष्य में भी विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास से जुड़ी ऐसी गतिविधियों को प्रोत्साहित करने की बात कही।
















