


नवगछिया के गोपालपुर प्रखंड मुख्यालय के पीछे सटे ब्रह्मोत्तर तटबंध पर लगातार बढ़ रहे जलस्तर का दबाव शनिवार दोपहर दिखाई देने लगा। तटबंध से पानी का रिसाव शुरू होने के बाद आसपास के ग्रामीणों में चिंता बढ़ गई। सूचना मिलने पर जल संसाधन विभाग की ओर से मौके पर बालू भरी बोरियां पहुंचाकर रिसाव को रोकने का प्रयास किया गया, लेकिन तटबंध पर खतरा अभी टला नहीं है।
ग्रामीणों का कहना है कि तटबंध की स्थिति को देखते हुए पहले से ही पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था की जरूरत थी, लेकिन समय रहते मुकम्मल इंतजाम नहीं किए गए। पानी का दबाव बढ़ने के साथ रिसाव शुरू होने से ग्रामीणों को तटबंध के क्षतिग्रस्त होने की आशंका सता रही है।

हाईकोर्ट के अधिवक्ता मुकेश कुमार ने आरोप लगाया कि तटबंध को भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है। उन्होंने कहा कि तटबंध की जमीन को रैयती भूमि बताकर जिम्मेदार अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेते हैं। उनके अनुसार, संबंधित जिम्मेदार लोगों को स्थिति की जानकारी दिए जाने के बावजूद अब तक ठोस पहल नहीं की गई है।
ग्रामीणों ने बताया कि तटबंध कमजोर हुआ तो स्थिति गंभीर हो सकती है। पिछले वर्ष की तरह तटबंध क्षतिग्रस्त होने की स्थिति में गोपालपुर प्रखंड मुख्यालय समेत आसपास के दो प्रखंडों के बड़े हिस्से में बाढ़ का पानी पहुंचने की आशंका है। इससे आम लोगों के सामने जान-माल की सुरक्षा का संकट खड़ा हो सकता है।

ग्रामीणों ने प्रशासन और जल संसाधन विभाग से तटबंध की तत्काल निगरानी बढ़ाने, रिसाव वाले स्थान पर प्रभावी बचाव कार्य कराने और संवेदनशील हिस्सों को मजबूत करने की मांग की है। उनका कहना है कि समय रहते स्थायी और प्रभावी उपाय नहीं किए गए तो बाद में राहत एवं बचाव कार्य पर अधिक सरकारी संसाधन खर्च होने के साथ लोगों को भी भारी परेशानी झेलनी पड़ सकती है।
















