


भवानीपुर थाना चौक पर विश्वकर्मा पूजा महोत्सव का भव्य शुभारंभ
नगर परिषद सभापति प्रतिनिधि प्रेमसागर उर्फ डब्लू यादव ने किया उद्घाटन, भगवान विश्वकर्मा की महिमा का किया विस्तार से वर्णन
नवगछिया के भवानीपुर थाना चौक के समीप गुरुवार को भगवान विश्वकर्मा पूजा महोत्सव का विधिवत शुभारंभ किया गया। पूजा महोत्सव के उद्घाटन कार्यक्रम में नवगछिया नगर परिषद के सभापति प्रतिनिधि सह 153 गोपालपुर विधानसभा के पूर्व प्रत्याशी प्रेमसागर उर्फ डब्लू यादव सहित अन्य गणमान्य लोग शामिल हुए। सामूहिक रूप से भगवान विश्वकर्मा की पूजा-अर्चना एवं दीप प्रज्वलित कर महोत्सव का शुभारंभ किया गया।

इस अवसर पर प्रेमसागर उर्फ डब्लू यादव ने उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए भगवान विश्वकर्मा के धार्मिक, आध्यात्मिक एवं पौराणिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भगवान विश्वकर्मा को देवशिल्पी और सृष्टि के महान शिल्पकार के रूप में पूजा जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार देवताओं के अस्त्र-शस्त्र से लेकर भव्य भवनों और नगरों के निर्माण में भगवान विश्वकर्मा की अद्भुत शिल्पकला का उल्लेख मिलता है। भगवान शिव का त्रिशूल, भगवान विष्णु का सुदर्शन चक्र और अनेक दिव्य वस्तुओं के निर्माण का श्रेय भी धार्मिक परंपराओं में भगवान विश्वकर्मा को दिया गया है।
उन्होंने कहा कि भगवान विश्वकर्मा केवल निर्माण और शिल्प के देवता ही नहीं, बल्कि श्रम, कौशल, सृजन और तकनीकी दक्षता के प्रतीक भी हैं। आज के समय में जब दुनिया आधुनिक तकनीक और निर्माण के क्षेत्र में लगातार आगे बढ़ रही है, तब भगवान विश्वकर्मा की पूजा हमें अपने श्रम और हुनर के प्रति सम्मान का संदेश देती है।

प्रेमसागर उर्फ डब्लू यादव ने भगवान विश्वकर्मा द्वारा विभिन्न पौराणिक नगरों के निर्माण की कथाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि धार्मिक मान्यताओं में स्वर्गलोक, इंद्रपुरी, लंका, द्वारका और इंद्रप्रस्थ जैसी भव्य नगरियों के निर्माण से भगवान विश्वकर्मा का संबंध बताया गया है। भगवान श्रीकृष्ण की द्वारका नगरी के निर्माण तथा पांडवों की इंद्रप्रस्थ नगरी की अद्भुत वास्तुकला का वर्णन भी पौराणिक परंपराओं में मिलता है।
उन्होंने भगवान शिव के त्रिशूल का प्रसंग बताते हुए कहा कि सनातन परंपरा में भगवान विश्वकर्मा को दिव्य अस्त्रों और उपकरणों का निर्माता माना गया है। भगवान शिव का त्रिशूल केवल एक अस्त्र नहीं, बल्कि शक्ति, संरक्षण और धर्म की स्थापना का प्रतीक माना जाता है। इसी प्रकार भगवान विष्णु का सुदर्शन चक्र भी दिव्य शिल्पकला का उदाहरण माना गया है।
उन्होंने कहा कि विश्वकर्मा पूजा का संदेश आज के समाज में और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। किसान के औजार से लेकर कारीगर के उपकरण, मशीनों, वाहनों, कारखानों और निर्माण कार्य में इस्तेमाल होने वाले साधनों तक, प्रत्येक वस्तु के पीछे किसी न किसी श्रमिक, कारीगर और तकनीकी दक्ष व्यक्ति का परिश्रम जुड़ा होता है। विश्वकर्मा पूजा ऐसे सभी श्रम और कौशल के सम्मान का पर्व है। विश्वकर्मा जयंती पर कार्यस्थलों, मशीनों, औजारों और निर्माण से जुड़ी वस्तुओं की पूजा की परंपरा भी इसी भावना से जुड़ी मानी जाती है।
उन्होंने कहा कि समाज को आगे बढ़ाने में श्रमिकों, कारीगरों, मिस्त्रियों, तकनीकी कर्मियों और छोटे-बड़े व्यवसाय से जुड़े लोगों की महत्वपूर्ण भूमिका है। भगवान विश्वकर्मा की पूजा हमें यह संदेश देती है कि कोई भी काम छोटा नहीं होता और मेहनत, हुनर तथा ईमानदारी से किया गया कार्य समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देता है।
कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा के समक्ष पूजा-अर्चना कर क्षेत्र की सुख-शांति और समृद्धि की कामना की। पूजा स्थल पर श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही। लोगों ने भगवान विश्वकर्मा से अपने कारोबार, रोजगार, कार्यक्षेत्र और परिवार की उन्नति की प्रार्थना की।
आयोजकों ने बताया कि विश्वकर्मा पूजा महोत्सव को लेकर भवानीपुर थाना चौक के समीप विशेष तैयारी की गई है। पूजा स्थल को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। महोत्सव के दौरान आसपास के क्षेत्रों से भी श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। पूजा को लेकर स्थानीय लोगों में विशेष उत्साह देखा गया।
इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने भगवान विश्वकर्मा की पूजा-अर्चना कर समाज में सुख-शांति, समृद्धि, आपसी भाईचारे और क्षेत्र के विकास की कामना की। कार्यक्रम के दौरान धार्मिक आस्था के साथ श्रम और कौशल के सम्मान का संदेश भी दिया गया।















