


बिहार का पहला अनोखा ‘भगजोगिनी’ पार्क
@ बचपन की यादों से गायब हो रहे जुगनुओं को मिलेगा नया आशियाना, बरारी के किलकारी परिसर में शुरू हुई अनोखी संरक्षण पहल।
प्रदीप विद्रोही

भागलपुर। बरसात की रातों में खेत-खलिहानों और झाड़ियों के बीच टिमटिमाती ‘भगजोगिनी’ (जुगनू) अब केवल पुरानी यादों का हिस्सा नहीं रहेंगी। बिहार में पहली बार इन नन्हें रोशनी बिखेरने वाले जीवों के संरक्षण के लिए भागलपुर के बरारी स्थित किलकारी, बाल भवन परिसर में राज्य का पहला जुगनू पार्क विकसित किया जाएगा। यह सिर्फ एक पार्क नहीं, बल्कि जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण की नई सोच का प्रतीक बनने जा रहा है।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना की शुरुआत सर्वेक्षण से हो चुकी है। 12 सदस्यीय विशेषज्ञ टीम जुगनुओं के प्राकृतिक आवासों की पहचान में जुटी है। बरारी, जैन मंदिर क्षेत्र और सैंडिस कंपाउंड समेत कई स्थानों पर उनकी मौजूदगी दर्ज की गई है, जबकि बाईपास, लोदीपुर और सबौर सहित अन्य इलाकों में भी सर्वे जारी है।
किलकारी के प्रमंडलीय कार्यक्रम समन्वयक साहिल राज के अनुसार, सर्वे पूरा होने के बाद परिसर के पिछले हिस्से में जुगनुओं के अनुकूल प्राकृतिक वातावरण तैयार किया जाएगा। यहां स्थानीय प्रजातियों के लिए सुरक्षित आवास विकसित होंगे, ताकि बच्चे और आम लोग प्राकृतिक परिवेश में जुगनुओं को देख सकें और जैव विविधता संरक्षण को करीब से समझ सकें।
परियोजना के तहत केवल जुगनुओं को बसाना ही उद्देश्य नहीं है, बल्कि उनकी घटती संख्या के कारणों का वैज्ञानिक अध्ययन और दस्तावेजीकरण भी किया जाएगा। टीम झाड़ियों, आर्द्र भूमि और हरित क्षेत्रों में उनके व्यवहार, प्रजनन और पर्यावरणीय जरूरतों का अध्ययन कर रही है।
विशेषज्ञों ने लोगों से रात में अनावश्यक कृत्रिम रोशनी कम करने की अपील भी की है। उनका कहना है कि तेज रोशनी जुगनुओं के प्रजनन और जीवन चक्र को प्रभावित करती है। इसलिए संरक्षण अभियान में आम लोगों की भागीदारी भी अहम होगी।
वर्ष 2027 से पार्क के निर्माण का कार्य शुरू होने की संभावना है। इसके साथ ही चिन्हित स्थानों पर जागरूकता बोर्ड लगाए जाएंगे, ताकि लोग ‘भगजोगिनी’ के महत्व और संरक्षण के उपायों से परिचित हो सकें।
यह पहल भागलपुर को सिर्फ रेशम और गंगा डॉल्फिन की पहचान तक सीमित नहीं रखेगी, बल्कि अब यह ‘जुगनुओं के शहर’ के रूप में भी नई पहचान बना सकती है।
















