


प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। झारखंड से बिहार में प्रवेश करने वाले गिट्टी लदे ट्रकों पर अब प्रशासन की नजर पहले से कहीं अधिक सख्त हो गई है। बिहार सरकार ने सीमावर्ती जिलों में अवैध खनिज परिवहन, ओवरलोडिंग और एक ही माइनिंग चालान व ई-वे बिल का बार-बार इस्तेमाल कर की जा रही ढुलाई को गंभीरता से लेते हुए व्यापक जांच अभियान शुरू करने का निर्देश दिया है। परिवहन विभाग के इस कदम से गिट्टी कारोबार और ट्रांसपोर्ट नेटवर्क में हलचल मच गई है।
राज्य परिवहन आयुक्त ने बिहार के सभी सीमावर्ती जिलों के जिलाधिकारियों को पत्र भेजकर निर्देश दिया है कि झारखंड से आने वाले गिट्टी वाहनों की सघन जांच की जाए। जहां भी नियमों का उल्लंघन मिले, वहां मोटर वाहन अधिनियम, 1988 (संशोधित 2019) के तहत वाहन मालिकों, ट्रांसपोर्टरों और संबंधित कंपनियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
एक चालान पर कई ट्रिप, करोड़ों के राजस्व नुकसान का आरोप:
यह कार्रवाई बिहार ट्रक ऑनर एसोसिएशन की शिकायत के बाद शुरू हुई है। एसोसिएशन का आरोप है कि झारखंड के साहेबगंज, पाकुड़ और आसपास के खनन क्षेत्रों से निकलने वाले कई ट्रक एक ही माइनिंग चालान और ई-वे बिल का बार-बार उपयोग कर कई चक्कर लगा रहे हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो इससे सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है और खनन व परिवहन नियमों की खुली अवहेलना हो रही है।
ओवरलोडिंग से सड़क और पुलों पर बढ़ा खतरा
शिकायत में यह भी कहा गया है कि कई वाहन निर्धारित क्षमता से कहीं अधिक गिट्टी लादकर बिहार की सीमा में प्रवेश कर रहे हैं। इससे न केवल सड़क सुरक्षा प्रभावित हो रही है, बल्कि राज्य की सड़कों, पुलों और पुलियों पर भी अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। परिवहन विभाग ने ऐसे मामलों को गंभीर मानते हुए सीमावर्ती चेकपोस्टों पर निगरानी बढ़ाने और नियमित जांच अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं।
सीमा पर बढ़ेगी निगरानी, कार्रवाई होगी सख्त
परिवहन विभाग का मानना है कि सीमा पर प्रभावी जांच से अवैध खनिज परिवहन, फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल और ओवरलोडिंग जैसी अनियमितताओं पर रोक लगाई जा सकेगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले किसी भी वाहन या कंपनी के प्रति नरमी नहीं बरती जाएगी।
घोघा के पुराने मामले ने फिर पकड़ा तूल:
इधर, इस कार्रवाई के बीच भागलपुर के घोघा थाना से जुड़े एक पुराने मामले की भी चर्चा तेज हो गई है। स्थानीय लोगों का दावा है कि पिछले वर्ष अक्टूबर में जब्त किए गए कुछ ट्रक बाद में फरार हो गए थे और वे आज भी गिट्टी, बालू तथा छाई की ढुलाई में इस्तेमाल किए जा रहे हैं।
यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि ऐसे कुछ ट्रक घोघा क्षेत्र स्थित एक निजी कंपनी की साइट पर देखे गए हैं। हालांकि प्रशासन की ओर से इन दावों की अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग लगातार उठ रही है।
अब निगाहें कार्रवाई पर:
परिवहन विभाग के ताजा निर्देशों के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सीमावर्ती जिलों में जांच अभियान कितना प्रभावी साबित होता है और अवैध गिट्टी परिवहन, फर्जी चालान तथा ओवरलोडिंग के मामलों पर कितनी सख्ती से कार्रवाई हो पाती है। वहीं, घोघा से जुड़े पुराने मामले की भी दोबारा जांच होती है या नहीं, इस पर स्थानीय लोगों और ट्रांसपोर्ट कारोबार से जुड़े लोगों की नजर बनी हुई है।
















