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पीरपैंती प्रखंड के श्रीमतपुर हुजूरनगर पंचायत स्थित विनोबाटोला में शनिवार को संतमत सत्संग के प्रवर्तक महर्षि मेँहीँ परमहंसजी महाराज का 122वां महावैराग्य दिवस श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने शोभायात्रा निकालकर “श्री सद्गुरु महाराज की जय” के जयघोष लगाए।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ. शिवनाथ बाबा ने महर्षि मेँहीँ के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 4 जुलाई 1904 को तत्कालीन एंट्रेंस परीक्षा के दौरान पूर्णिया जिला स्कूल में अंग्रेजी की “Builders” कविता की व्याख्या करते समय उन्हें गहरा वैराग्य हुआ। उन्होंने उत्तरपुस्तिका पर “देह धरे कर यहि फल भाई, भजिअ राम सब काम बिहाई” लिखकर परीक्षाभवन से ही गृहत्याग कर दिया और गुरु की खोज में निकल पड़े। बाद में बाबा देवी साहब से दीक्षा लेकर कुप्पाघाट, भागलपुर में ईश्वर का साक्षात्कार किया।

डॉ. शिवनाथ बाबा ने कहा कि महर्षि मेँहीँ दुनिया के ऐसे विरले संत माने जाते हैं जिन्होंने परीक्षाभवन से ही गृहत्याग किया। वहीं खगड़िया की सुप्रिया चन्दा ने कहा कि “Builders” कविता की व्याख्या ही महर्षि मेँहीँ के वैराग्य का कारण बनी।

कार्यक्रम में ओमराम, हेगुरु, बोलोबम, सुप्रिया चन्दा, शिक्षा आनंद, समीक्षा आनंद, लाडो, विशाल, करिश्मा, सुप्रिया विकास, श्रेयांश राज सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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