


प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। गंगा के बढ़ते जलस्तर के बीच बिहार सरकार ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में निगरानी और राहत-बचाव अभियान तेज कर दिया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोमवार को पटना, बेगूसराय और भागलपुर जिले के संवेदनशील क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण कर जमीनी हालात का जायजा लिया।
मुख्यमंत्री ने नवगछिया-राघोपुर दियारा, कोसी-गंगा संगम क्षेत्र, बेगूसराय और बख्तियारपुर समेत कई इलाकों का हवाई निरीक्षण किया। इस दौरान दियारा और निचले क्षेत्रों में पानी की स्थिति, गंगा एवं सहायक नदियों के जलस्तर तथा राहत-बचाव कार्यों की प्रगति की समीक्षा की गई।
फरक्का से राहत की उम्मीद:
भागलपुर एयरपोर्ट पर अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री को बताया गया कि पानी का दबाव तेजी से कम हो रहा है और आने वाले समय में स्थिति में सुधार की उम्मीद है। अधिकारियों के अनुसार, मुख्यमंत्री की पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री से बातचीत के बाद फरक्का बराज के सभी गेट खोल दिए गए हैं। इससे गंगा के जलदबाव में कमी आने की उम्मीद जताई गई है।

संवेदनशील इलाकों पर लगातार नजर:
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निचले और संवेदनशील इलाकों की लगातार निगरानी करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन पूरी तरह तैयार रहे और प्रभावित लोगों तक भोजन, पेयजल, राहत सामग्री तथा अन्य जरूरी सुविधाएं समय पर पहुंचाई जाएं।
उन्होंने जल संसाधन विभाग को लगातार मॉनिटरिंग करने तथा जरूरत के अनुसार अविलंब मरम्मती कार्य कराने का निर्देश दिया। साथ ही राहत एवं बचाव कार्यों में विभागों के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने को कहा।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि बाढ़ प्रभावित लोगों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को एसओपी के अनुसार प्रभावित लोगों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने और जलस्तर में होने वाले बदलाव पर लगातार नजर रखने का निर्देश दिया।
हवाई सर्वेक्षण और समीक्षा बैठक के दौरान उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी, ऊर्जा मंत्री शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, डीजीपी (अभियान) कुंदन कृष्णन, जल संसाधन विभाग के सचिव डॉ. चन्द्रशेखर सिंह समेत भागलपुर के प्रमंडलीय एवं जिला स्तर के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
फरक्का के सभी गेट खुलने और गंगा में पानी का दबाव घटने की सूचना के बीच अब प्रशासन की नजर उन इलाकों पर है, जहां जलस्तर बढ़ने से सबसे ज्यादा खतरा है। सरकार ने राहत के साथ-साथ तटबंध एवं अन्य संवेदनशील संरचनाओं की मरम्मती और लगातार निगरानी को प्राथमिकता दी है।
















