


आधुनिक मत्स्य पालन तकनीक, उद्यमिता और रोजगार की संभावनाओं पर विशेषज्ञों ने किया मार्गदर्शन
नवगछिया। जी. बी. कॉलेज, नवगछिया के इंडस्ट्रियल फिश एंड फिशरीज विभाग द्वारा सोमवार को फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (एफडीपी) सेल के तत्वावधान में “भारत में मीठे पानी की मछली और झींगा पालन में हाल के रुझान” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं शिक्षकों को मत्स्य पालन के क्षेत्र में हो रहे नवीन वैज्ञानिक विकास, आधुनिक तकनीकों तथा स्वरोजगार की संभावनाओं से अवगत कराना था।

कार्यक्रम की अध्यक्षता एवं स्वागत भाषण महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सत्येन्द्र कुमार ने किया। उन्होंने कहा कि मत्स्य पालन एवं झींगा (प्रॉन) संस्कृति ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के साथ-साथ युवाओं के लिए स्वरोजगार का प्रभावी माध्यम बन रही है। उन्होंने विद्यार्थियों से आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाकर इस क्षेत्र में नवाचार एवं उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया।
कार्यशाला के मुख्य संसाधन व्यक्ति श्री सुब्रतो घोष, सहायक मत्स्य पदाधिकारी, पश्चिम बंगाल ने मीठे जल में मछली एवं झींगा पालन की आधुनिक तकनीकों, गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज उत्पादन, वैज्ञानिक प्रबंधन, रोग नियंत्रण, जल गुणवत्ता संरक्षण तथा विपणन के नवीन तरीकों पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने प्रतिभागियों के प्रश्नों का उत्तर देते हुए मत्स्य पालन के क्षेत्र में उपलब्ध रोजगार एवं उद्यमिता की अपार संभावनाओं पर भी विस्तार से प्रकाश डाला।
फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम सेल के समन्वयक एवं इंडस्ट्रियल फिश एंड फिशरीज विभाग के समन्वयक डॉ. फिरोज अहमद ने कार्यशाला का विषय प्रवेश कराया तथा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने कार्यशाला के उद्देश्य एवं इसकी उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए मुख्य वक्ता, प्राचार्य, अतिथियों, शिक्षकों एवं सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम का संचालन फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम सेल के सहायक समन्वयक डॉ. मो. मोसर्रत हुसैन ने किया। उनके प्रभावी संचालन से पूरा कार्यक्रम सुव्यवस्थित एवं सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
कार्यशाला में महाविद्यालय के शिक्षक, शोधार्थी तथा इंडस्ट्रियल फिश एंड फिशरीज विभाग के बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। विशेषज्ञों ने कहा कि आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों के उपयोग से मत्स्य एवं झींगा पालन को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है, जिससे किसानों और युवाओं की आय में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है।
















