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गंगा कटाव में उजड़ा आशियाना, दो दशक से पॉलीथिन की छांव में गुजर रहा जीवन

नवगछिया: विक्रमशिला पुल के जहान्वी चौक से दियारा क्षेत्र को जोड़ने वाला इस्माइलपुर बिंद टोली तटबंध लगभग 20 किलोमीटर लंबा है। यह तटबंध अब केवल बाढ़ से सुरक्षा का माध्यम नहीं रह गया है, बल्कि गंगा कटाव से विस्थापित परिवारों के लंबे संघर्ष और मजबूरी की कहानी भी बयान करता है। पिछले करीब दो दशकों से कटाव पीड़ित परिवार यहां मूलभूत सुविधाओं के अभाव में पॉलीथिन शीट की झोपड़ियों में जीवन यापन करने को विवश हैं।

गंगा की बदलती धार ने इन परिवारों का स्थायी आशियाना छीन लिया है। तटबंध पर बसे अस्थायी ठिकानों में पल-बढ़ रहे बच्चों की दुनिया इसी सीमित दायरे तक सिमट कर रह गई है। यहां न पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध है और न ही बच्चों की नियमित शिक्षा की समुचित व्यवस्था। हर वर्ष आने वाली बाढ़ इन परिवारों के लिए तय समय पर आने वाली आपदा बन चुकी है, जो खुशियों की जगह तबाही और असुरक्षा लेकर आती है।

भीषण गर्मी, मूसलाधार बारिश और कड़ाके की ठंड—हर मौसम की मार खुले आसमान के नीचे झेलते हुए लोग किसी तरह अपना जीवन गुजार रहे हैं। रोजी-रोटी की समस्या के साथ-साथ सुरक्षा और स्वास्थ्य की चिंता भी लगातार बनी रहती है।

कटाव पीड़ितों का कहना है कि सरकार की ओर से पुनर्वास की बातें तो समय-समय पर की जाती हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर अब तक स्थायी समाधान नहीं मिल सका है। एक ओर प्राकृतिक आपदा का संकट है, तो दूसरी ओर अतिक्रमण हटाने की प्रशासनिक कार्रवाई का भय भी बना रहता है, जिससे उनका जीवन अस्थिरता और अनिश्चितता के बीच गुजर रहा है।

बुद्धू चक के कटाव पीड़ित कौशल कुमार ने बताया कि हाल ही में वे अपनी झोपड़ी में सोए हुए थे, तभी जंगल की ओर से एक सांप आकर उनके खाट पर बैठ गया। उन्होंने कहा कि संयोग अच्छा रहा कि समय रहते उनकी जान बच गई, लेकिन ऐसी घटनाएं यहां रहने वाले लोगों के लिए आम हो चुकी हैं।

सुशासन और विकास के दावों के बीच कटाव पीड़ित परिवारों का सवाल है कि आखिर कब तक वे गंगा की धार के साथ अपनी किस्मत बहते देखते रहेंगे। वे स्थायी पुनर्वास, स्वास्थ्य सुविधा, बच्चों की शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं की मांग कर रहे हैं, ताकि उन्हें सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन मिल सके।

फोटो कैप्शन:
तटबंध पर पालने में झूलता मासूम, खुले आसमान के नीचे गुजरता बचपन।
कड़ाके की ठंड में गंगा किनारे पॉलीथिन शीट के सहारे सोती वृद्ध महिला।

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