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प्रदीप विद्रोही

भागलपुर। जिस कचरे को अब तक शहर के लिए मुसीबत माना जाता रहा है, वही अब भागलपुर के लिए ऊर्जा का नया स्रोत बनने जा रहा है। कंकैथी डंपिंग ग्राउंड में जमा होने वाला जैविक कचरा अब सिर्फ बदबू और प्रदूषण की वजह नहीं रहेगा, बल्कि इसी कचरे से गैस और जैविक खाद तैयार करने की योजना है। इसके लिए करीब 10 एकड़ जमीन पर कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) प्लांट स्थापित किया जाएगा।


इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) को जमीन उपलब्ध कराने की मंजूरी दी गई है। प्रस्तावित प्लांट पर करीब 139 करोड़ रुपये खर्च किए जाने की योजना है। परियोजना के आकार और निवेश को देखते हुए इसे भागलपुर में कचरा प्रबंधन के क्षेत्र की बड़ी पहल माना जा रहा है।
रोज 10 टन कचरे से तैयार होगी CBG:
प्रस्तावित प्लांट में नगर निगम क्षेत्र से निकलने वाले जैविक कचरे का इस्तेमाल किया जाएगा। योजना के मुताबिक प्रतिदिन करीब 10 टन कंप्रेस्ड बायोगैस तैयार की जाएगी। यानी शहर से निकलने वाला कचरा एक तरफ हटेगा और दूसरी तरफ उससे वैकल्पिक ईंधन तैयार होगा। इससे कचरा प्रबंधन की मौजूदा व्यवस्था पर दबाव कम करने के साथ ऊर्जा के क्षेत्र में भी एक नया विकल्प तैयार हो सकता है।
नगर निगम पर नहीं आएगा 139 करोड़ का बोझ:
परियोजना की सबसे खास बात यह है कि प्लांट की स्थापना और संचालन का खर्च नगर निगम को नहीं उठाना होगा। करीब 139 करोड़ रुपये का निवेश HPCL की ओर से किया जाएगा।
नगर निगम की जिम्मेदारी मुख्य रूप से प्लांट के लिए जरूरी अलग किया हुआ जैविक कचरा और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की होगी। परियोजना के लिए जमीन 25 वर्षों के लिए निःशुल्क उपयोग के लिए उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।
डंपिंग ग्राउंड से निकलेगा नया रास्ता:
कंकैथी डंपिंग ग्राउंड लंबे समय से शहर के कचरे के दबाव का हिस्सा रहा है। यदि जैविक कचरे का नियमित रूप से प्लांट में इस्तेमाल होने लगेगा, तो डंपिंग ग्राउंड में पहुंचने वाले कचरे की मात्रा को कम करने में मदद मिल सकती है। यानी जिस जगह पर अभी कचरे का पहाड़ शहर की समस्या नजर आता है, वहीं से कचरे को संसाधन में बदलने की नई कहानी शुरू हो सकती है।
गैस के साथ जैविक खाद भी बनेगी:
CBG प्लांट का फायदा केवल गैस उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगा। जैविक कचरे के प्रसंस्करण से जैविक खाद तैयार होने की भी उम्मीद है। इससे कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण के साथ कृषि और पर्यावरण के लिहाज से भी लाभ मिल सकता है।
भागलपुर के लिए क्यों खास है परियोजना?
इस परियोजना के जमीन पर उतरने के बाद शहर को एक साथ कई फायदे मिलने की उम्मीद है – कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण को बढ़ावा मिलेगा। डंपिंग ग्राउंड पर कचरे का दबाव कम हो सकता है।जैविक कचरे से CBG यानी वैकल्पिक ईंधन तैयार होगा।जैविक खाद का उत्पादन संभव होगा। खुले में कचरा जमा होने और उससे होने वाले प्रदूषण को कम करने में मदद मिलेगी।नगर निगम को बड़े पूंजीगत निवेश का बोझ नहीं उठाना पड़ेगा।
कचरे से कमाई और स्वच्छता की उम्मीद:
भागलपुर की यह परियोजना सिर्फ कचरा हटाने की योजना नहीं है। इसका उद्देश्य कचरे को उपयोगी संसाधन में बदलना भी है। अगर प्लांट निर्धारित क्षमता के अनुसार संचालित हुआ, तो रोजाना निकलने वाले जैविक कचरे का इस्तेमाल कर ईंधन तैयार किया जा सकेगा।
ऐसे में कंकैथी का डंपिंग ग्राउंड आने वाले समय में सिर्फ कचरा जमा करने वाली जगह नहीं, बल्कि कचरे से ऊर्जा पैदा करने वाले केंद्र के रूप में पहचान बना सकता है। शहर की गंदगी से गैस और खाद तैयार करने की यह पहल भागलपुर के कचरा प्रबंधन की दिशा बदलने की क्षमता रखती है।

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