


कई दिनों से खुले आसमान के नीचे कट रही जिंदगी, बांस-पन्नी की झोपड़ी में बच्चों, बुजुर्गों और मवेशियों के साथ रहने की मजबूरी
नवगछिया। कोसी के बढ़ते जलस्तर और बाढ़ के कहर ने रंगरा प्रखंड के सधुवा-उसड़िया गांव के लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। गांव के 11 नंबर वार्ड के करीब 50 परिवार बाढ़ के कारण अपना घर-बार छोड़कर कटारिया स्टेशन पर शरण लेने को मजबूर हैं। कई दिनों से स्टेशन परिसर में खुले आसमान के नीचे रह रहे इन परिवारों के सामने अब पेयजल, शौचालय और भोजन का संकट गहराता जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि बाढ़ के कारण विस्थापित होने के बाद भी अब तक प्रशासन की ओर से उनके लिए पर्याप्त राहत व्यवस्था नहीं की गई है।

बाढ़ का पानी घरों के आसपास पहुंचने के बाद ग्रामीण जरूरी सामान समेटकर कटारिया स्टेशन पहुंचे। यहां बांस के सहारे पन्नी टांगकर लोगों ने किसी तरह अस्थायी झोपड़ी तैयार की है। इन्हीं झोपड़ियों में बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग और मवेशी एक साथ रहने को मजबूर हैं। तेज धूप और उमस के बीच खुले में रहने से लोगों की परेशानी बढ़ गई है। बारिश होने पर पन्नी से पानी टपकने लगता है, जिससे कपड़े, बिस्तर और घरेलू सामान भीग जाते हैं।
स्टेशन परिसर में हादसे का भी डर
ग्रामीणों का कहना है कि कटारिया स्टेशन पर लोगों और ट्रेनों की आवाजाही के कारण बच्चों एवं मवेशियों की सुरक्षा को लेकर हमेशा डर बना रहता है। बाढ़ से घर छोड़कर सुरक्षित स्थान की उम्मीद में स्टेशन पहुंचे परिवार अब यहां भी खुद को पूरी तरह सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं।

लोगों के सामने रहने के साथ-साथ रोजमर्रा की मूलभूत जरूरतों का संकट भी खड़ा हो गया है। ग्रामीणों के अनुसार, कई दिनों से वे स्टेशन परिसर में रह रहे हैं, लेकिन अब तक पर्याप्त राहत सामग्री उपलब्ध नहीं कराई गई है।
न पानी की समुचित व्यवस्था, न शौचालय
बाढ़ पीड़ित परिवारों का कहना है कि स्टेशन परिसर में पीने के पानी की समुचित व्यवस्था नहीं है। शौचालय की सुविधा नहीं होने के कारण महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। भोजन की व्यवस्था भी कई परिवारों के लिए बड़ी चुनौती बन गई है।
ग्रामीणों का आरोप है कि अब तक प्रशासन की ओर से उन्हें सूखा राशन तक उपलब्ध नहीं कराया गया है। ऐसे में बाढ़ के कारण घर छोड़ चुके परिवारों के सामने भोजन की समस्या भी लगातार बढ़ती जा रही है।
महिलाओं के लिए खुले में शौच की मजबूरी
ग्रामीण सुलेखा देवी ने बताया कि स्टेशन परिसर में महिलाओं के लिए शौचालय की कोई व्यवस्था नहीं है। चारों ओर लोगों की आवाजाही के बीच महिलाओं को खुले में शौच जाने में काफी परेशानी होती है। उन्होंने प्रशासन से तत्काल अस्थायी शौचालय, पेयजल और भोजन की व्यवस्था कराने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि बाढ़ के कारण घर छोड़ना पड़ा और अब स्टेशन पर भी मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। ऐसे में महिलाओं और बच्चों की परेशानी लगातार बढ़ रही है।
‘कई दिन बीत गए, हाल जानने तक नहीं पहुंचे अधिकारी’
बाढ़ पीड़ितों का आरोप है कि कई दिनों से वे कटारिया स्टेशन पर शरण लिए हुए हैं, लेकिन अब तक बीडीओ, सीओ या कोई जनप्रतिनिधि उनकी स्थिति देखने नहीं पहुंचा है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन को कम से कम मौके पर पहुंचकर विस्थापित परिवारों की स्थिति का जायजा लेना चाहिए था।
लोगों ने तत्काल राहत शिविर जैसी व्यवस्था करने की मांग की है। ग्रामीणों के अनुसार, शिविर में पेयजल, शौचालय, भोजन, सूखा राशन, दवा और रहने के लिए आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई जानी चाहिए, ताकि बाढ़ प्रभावित परिवारों को कुछ राहत मिल सके।
ग्रामीण अमित सिंह निषाद, पप्पू सिंह निषाद, जया देवी, सुलेखा देवी समेत अन्य लोगों ने कहा कि घर छोड़ने के बाद स्टेशन ही उनका सहारा बना हुआ है। बच्चों और बुजुर्गों के साथ खुले में रहना दिन-ब-दिन मुश्किल होता जा रहा है। यदि जल्द राहत नहीं पहुंचाई गई तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
बाढ़ पीड़ितों ने की तत्काल राहत की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि कटारिया स्टेशन पर तत्काल पहुंचकर बाढ़ पीड़ित परिवारों का सर्वे कराया जाए। इसके बाद अस्थायी राहत शिविर लगाकर प्रभावित परिवारों के लिए पेयजल, शौचालय, भोजन, सूखा राशन और दवा की व्यवस्था की जाए।
ग्रामीणों ने सुरक्षित रहने के लिए आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराने की भी मांग की है। उनका कहना है कि बाढ़ के कारण घर से विस्थापित परिवारों को फिलहाल तत्काल राहत और सुरक्षित आश्रय की आवश्यकता है। प्रशासन द्वारा समय रहते आवश्यक व्यवस्था किए जाने से बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की परेशानियों को कम किया जा सकता है।















