


हर तीन दिन में एक जान जा रही, बढ़ते हादसों ने बढ़ाई चिंता
नवगछिया पुलिस जिला में सड़क दुर्घटनाओं का ग्राफ लगातार भयावह होता जा रहा है। बीते पांच महीनों के भीतर सड़क हादसों में 41 लोगों की मौत ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार औसतन हर तीन दिन में एक व्यक्ति सड़क दुर्घटना का शिकार होकर अपनी जान गंवा रहा है। लगातार बढ़ती घटनाओं ने यातायात व्यवस्था, निगरानी तंत्र और सुरक्षा उपायों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
महीनेवार आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति और चिंताजनक दिखाई देती है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार अक्टूबर महीने में 7, नवंबर में 6, दिसंबर में 8, जनवरी में 8 तथा फरवरी में अब तक 11 लोगों की मौत सड़क हादसों में हो चुकी है। लगातार बढ़ते आंकड़ों ने आम लोगों के बीच भय और असुरक्षा की भावना पैदा कर दी है।
विशेषज्ञों और पुलिस अधिकारियों के अनुसार दुर्घटनाओं की सबसे बड़ी वजह तेज रफ्तार बनकर उभरी है। इसके अलावा नाबालिग चालकों द्वारा बिना लाइसेंस वाहन चलाना, ट्रैफिक नियमों की अनदेखी तथा सूखा नशा यानी प्रतिबंधित नशीले पदार्थों का सेवन भी हादसों को बढ़ावा दे रहा है। बिना हेलमेट बाइक चलाना, सीट बेल्ट का उपयोग न करना और लापरवाही से वाहन चलाना जिले में आम दृश्य बन चुका है। कमजोर निगरानी और सीमित कार्रवाई के कारण ऐसे चालकों पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हो पा रहा है।
शहर के कई प्रमुख चौक-चौराहे और खतरनाक मोड़ अब ‘डेंजर जोन’ में तब्दील हो चुके हैं। कई स्थानों पर चेतावनी संकेतक, स्पीड ब्रेकर और स्पष्ट रोड मार्किंग का अभाव है, जिससे वाहन चालक अनजाने में तेज रफ्तार बनाए रखते हैं और दुर्घटनाएं हो जाती हैं।
शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में टोटो तथा छोटे वाहनों में ओवरलोड सवारी भी हादसों का बड़ा कारण बन रही है। कई चालक तेज आवाज में गाने बजाते हुए नियमों की अनदेखी करते हैं, जिससे सड़क पर जोखिम और बढ़ जाता है। वहीं राष्ट्रीय राजमार्ग-31 पर भारी वाहनों की बढ़ती आवाजाही ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।
लगातार हो रही मौतों के बावजूद यातायात व्यवस्था में सुधार के लिए ठोस और दीर्घकालिक कदम जमीन पर स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं दे रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सख्त अभियान, नियमित जांच और जागरूकता कार्यक्रम नहीं चलाए गए तो आने वाले समय में हादसों का आंकड़ा और भयावह रूप ले सकता है।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन सड़क सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए प्रभावी और सख्त कदम उठाएगा, या फिर नवगछिया की सड़कें यूं ही लोगों के लिए ‘मौत का रास्ता’ बनी रहेंगी।













