


नवगछिया । अनुमंडल विधिक सेवा समिति, व्यवहार न्यायालय नवगछिया के तत्वावधान में शनिवार को न्यायालय परिसर में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। मामलों के त्वरित निपटारे के लिए पांच पीठों का गठन किया गया था। सुबह 10 बजे से विभिन्न पीठों में बैंक रिकवरी, विद्युत, मोटर दुर्घटना, सुलहनीय आपराधिक, वन विभाग, माप-तौल और ट्रैफिक चालान से जुड़े मामलों की सुनवाई हुई।

बेंच-I में DJS-I अफजल आलम और पैनल अधिवक्ता कृष्ण कुमार आजाद ने मामलों की सुनवाई की। इस पीठ में MACT, विद्युत आपूर्ति प्रमंडल नवगछिया तथा SBI की शाखाओं से संबंधित मामलों को लिया गया। बैंक के 160 मामलों में 74,95,795 रुपये की समझौता राशि तय हुई, जिसमें 56,03,863 रुपये प्राप्त हुए। विद्युत से जुड़े 41 मामलों की भी सुनवाई हुई।
बेंच-II में DJS-II दिव्या प्रकाश और पैनल अधिवक्ता राजनीश कुमार सिंह ने मामलों की सुनवाई की। यहां UCO Bank से जुड़े 77 बैंक मामलों में 16,27,393 रुपये की समझौता राशि तथा 13,19,837 रुपये की प्राप्ति दर्ज की गई। विद्युत के 31 मामलों और एक मोटर दुर्घटना वाद का भी निपटारा हुआ। मोटर दुर्घटना वाद में 8.50 लाख रुपये की समझौता राशि तय हुई।

बेंच-III में ACJM-I अभिषेक आनंद और पैनल अधिवक्ता कुंदन कुमार चौधरी की पीठ ने सुनवाई की। बिहार ग्रामीण बैंक से जुड़े 280 मामलों में 2,97,70,964 रुपये की समझौता राशि तय हुई, जिसमें 1,45,39,553 रुपये प्राप्त हुए। इसके अलावा 40 शमनीय आपराधिक, वन विभाग के तीन तथा माप-तौल से जुड़े तीन मामलों की सुनवाई हुई।
बेंच-IV में JM-I सुप्रिया शेखर और पैनल अधिवक्ता कुंजलता कुमारी ने मामलों की सुनवाई की। विभिन्न बैंकों और BSNL से जुड़े नौ मामलों में 6,75,500 रुपये की समझौता राशि तय हुई, जिसमें 2,69,000 रुपये प्राप्त हुए। इस पीठ में 56 सुलहनीय आपराधिक मामलों की भी सुनवाई हुई।
बेंच-V में SDJM आशीष चंद्रा और पैनल अधिवक्ता बंदना कुमारी ने मामलों की सुनवाई की। विभिन्न बैंकों व माइक्रो फाइनेंस संस्थानों से जुड़े 23 मामलों में 7,49,500 रुपये की समझौता राशि तय हुई, जिसमें 3,64,000 रुपये प्राप्त हुए। इसके अलावा 48 सुलहनीय आपराधिक और 94 ट्रैफिक चालान मामलों की सुनवाई हुई। चालान में कुल 2,63,500 रुपये की राशि निर्धारित थी, जिसमें छूट के बाद 1,36,500 रुपये प्राप्त हुए।
राष्ट्रीय लोक अदालत का उद्देश्य पक्षकारों को त्वरित, सरल और कम खर्च में न्याय उपलब्ध कराना तथा आपसी सुलह-समझौते के माध्यम से विवादों का समाधान करना है। लोक अदालत में अपने मामलों के निपटारे के लिए बड़ी संख्या में पक्षकार और अधिवक्ता उपस्थित रहे।
















