


समारोह में मुख्य अतिथि प्रथम लोकपाल बीएनएमयू डॉ. शिवमुनि यादव तथा विशिष्ट अतिथि पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. कामेश्वर पंकज, डॉ. प्रभात नारायण झा एवं यमुना प्रसाद बसाक मौजूद रहे। वक्ताओं ने सुमित्रानंदन पंत के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए उन्हें हिंदी साहित्य का अमर साहित्यकार बताया।
साहित्य विभाग की संयोजिका डॉ. निरुपमा राय ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि पंत हिंदी के पहले साहित्यकार थे जिन्हें उनकी कृति ‘चिदंबरा’ पर ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त हुआ। उन्होंने पंत के साहित्यिक अवदान और प्रकृति प्रेम पर विस्तार से चर्चा की
।
अध्यक्षीय संबोधन में प्रो. विजया रानी ने पंत को प्रकृति का सुकुमार कवि बताते हुए उनकी रचनाओं और कविताओं की विशेषताओं पर प्रकाश डाला। वहीं डॉ. कामेश्वर पंकज ने छायावाद, पुनर्जागरण और पंत की काव्य दृष्टि का विश्लेषण करते हुए कहा कि प्रकृति का मानवीकरण उनकी रचनाओं की सबसे बड़ी विशेषता है।
डॉ. शिवमुनि यादव, डॉ. प्रभात नारायण झा एवं डॉ. उषा शरण ने भी पंत की साहित्यिक विरासत, प्रकृति चेतना और सामाजिक सरोकारों पर अपने विचार रखे। यमुना प्रसाद बसाक ने पंत की कविता का पाठ कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
द्वितीय सत्र में स्थानीय कवियों ने प्रकृति पर आधारित कविताओं का पाठ कर समारोह को साहित्यिक ऊंचाई प्रदान की। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में साहित्यकार, शिक्षक, विद्यार्थी एवं साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन एवं संयोजन डॉ. निरुपमा राय ने किया।















