


नवगछिया। मनिया मोर की एक साधारण सी सुबह अचानक दर्द और बेबसी की कहानी में बदल गई, जब 80 वर्षीय सुखिया देवी की दोनों बकरियां चोरी हो गईं। यह बकरियां ही उनकी जिंदगी का सहारा थीं, उनकी रोजी-रोटी का एकमात्र जरिया। जैसे ही चोरी की भनक लगी, वृद्धा का दिल टूट गया—वह सड़क किनारे बैठकर छाती पीट-पीटकर दहाड़ मारकर रोने लगीं। उनकी चीखें सुनकर आसपास के लोग भी भावुक हो उठे।
कांपती आवाज और आंसुओं के बीच सुखिया देवी ने डायल 112 को सूचना दी। कुछ ही देर में पुलिस टीम मौके पर पहुंची। पुलिस पदाधिकारी राहुल राज और चालक संजय यादव ने सबसे पहले वृद्धा को संभाला, उनकी पूरी बात ध्यान से सुनी। वृद्धा रोते-रोते उनके पैर पकड़ बैठीं और अपनी बकरियां वापस दिलाने की गुहार लगाने लगीं। यह दृश्य वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम कर गया।
लेकिन यहीं से कहानी ने करवट ली। डायल 112 की टीम ने तत्परता दिखाते हुए बिना समय गंवाए आसपास के इलाके में तलाश शुरू कर दी। मनिया मोर से आगे बढ़ते हुए जब टीम नया टोला के एक बगीचे के पास पहुंची, तो उनकी नजर दो संदिग्ध युवकों पर पड़ी। दोनों बकरियों के साथ खड़े थे और उन्हें बेचने की फिराक में थे।
पुलिस ने अपनी सूझबूझ और तेजी से कार्रवाई करते हुए दोनों को मौके पर ही पकड़ लिया। चोरी की गई दोनों बकरियां सुरक्षित बरामद कर ली गईं। इसके बाद आरोपियों और बकरियों को नवगछिया थाना लाया गया।
जैसे ही यह खबर सुखिया देवी तक पहुंची, उनकी दुनिया मानो फिर से बस गई। जो वृद्धा कुछ देर पहले तक बेसुध होकर रो रही थीं, वही खुशी से झूम उठीं। उनकी आंखों में आंसू थे, लेकिन इस बार यह आंसू खुशी के थे। वह बार-बार हाथ उठाकर कह रही थीं—“पुलिस बाबू की जय… पुलिस बाबू की जय…”
उन्होंने भावुक होकर कहा, “आज पुलिस ने मुझे मेरी जिंदगी लौटा दी, इससे बड़ा उपहार कुछ नहीं हो सकता।”
इस घटना ने न सिर्फ एक वृद्धा के चेहरे पर मुस्कान लौटाई, बल्कि पूरे इलाके में पुलिस के प्रति भरोसे को और मजबूत किया। स्थानीय लोगों ने डायल 112 की टीम की जमकर सराहना की और कहा कि ऐसी संवेदनशीलता और तत्परता ही पुलिस की असली पहचान है।
















