


@ सबौर महाविद्यालय के लिए अकादमिक उपलब्धि, शोधपरक लेख को मिली राष्ट्रीय स्तर पर जगह।

प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। सोशल मीडिया के दौर में फेक न्यूज़, राजनीतिक प्रचार और लोकतंत्र के बदलते स्वरूप पर सबौर महाविद्यालय के शिक्षक डॉ. मयंक वत्स की शोध-दृष्टि अब राष्ट्रीय अकादमिक विमर्श का हिस्सा बन गई है। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU), वाराणसी के राजनीति विज्ञान विभाग द्वारा प्रकाशित पुस्तक ‘India in the 21st Century: Society, Politics and Emerging Challenges’ में डॉ. मयंक वत्स का शोधपरक लेख प्रकाशित हुआ है।
पुस्तक का संपादन राजनीति विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) हेमंत कुमार मालवीय ने किया है, जबकि इसका प्रकाशन हंस प्रकाशन, दिल्ली द्वारा किया गया है। पुस्तक में डॉ. वत्स का लेख पांचवें अध्याय के रूप में शामिल किया गया है। उनके लेख का विषय “Information Technology, Social Media and Politics: Fake News, Political Propaganda and Impact on Democracy” है।
डिजिटल युग में सोशल मीडिया जिस तरह राजनीतिक संवाद, जनमत निर्माण और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को प्रभावित कर रहा है, लेख इसी बदलते परिदृश्य का विश्लेषण करता है। फेक न्यूज़ और राजनीतिक प्रचार से लोकतंत्र के सामने उत्पन्न चुनौतियों के साथ-साथ सूचना प्रौद्योगिकी और सोशल मीडिया के सकारात्मक प्रभावों पर भी शोधपरक विमर्श प्रस्तुत किया गया है।
डॉ. मयंक वत्स की इस उपलब्धि को सबौर महाविद्यालय के प्रधानाचार्य प्रो. (डॉ.) संजय कुमार झा ने डॉ. वत्स को बधाई देते हुए कहा कि शिक्षकों की शोध, लेखन और अकादमिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी का सीधा लाभ विद्यार्थियों को मिलेगा।
डॉ. मयंक वत्स की उपलब्धि पर महाविद्यालय के शिक्षकों डॉ. नाज़ परवीन, प्रो. (डॉ.) पारसमणि झा, डॉ. राकेश रंजन, डॉ. मनिलाल पासवान, डॉ. कुमार नित्य गोपाल, डॉ. नीरज सिन्हा, डॉ. रंजना कुमारी, डॉ. मो. शहाबुद्दीन, डॉ. बी. नूरजहाँ, डॉ. मीनू पाण्डेय, डॉ. सरोज कुमार, डॉ. विपुल वैभव, डॉ. वीरेंद्र कुमार यादव, डॉ. दिव्या ज्योति, डॉ. मो. इबरार सनी एवं डॉ. रवि शंकर मिश्रा सहित महाविद्यालय परिवार के सदस्यों ने बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।सोशल मीडिया से लोकतंत्र तक: BHU की पुस्तक में सबौर के शिक्षक डॉ. मयंक वत्स की शोध-दृष्टि

















