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भागलपुर। नवाचार को व्यवसाय में बदलने और युवाओं को आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में भागीदार बनाने के उद्देश्य से भागलपुर अभियंत्रण महाविद्यालय (बीसीई) में सोमवार को “पिच डेक प्रिपरेशन” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। स्टार्टअप सेल, बीसीई के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यशाला में 200 से अधिक छात्र-छात्राओं, नवाचारकर्ताओं एवं शिक्षकों ने भाग लेकर स्टार्टअप की दुनिया के व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी हासिल की।

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कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य युवाओं को यह समझाना था कि किसी भी नए विचार को सफल व्यवसाय में बदलने के लिए केवल तकनीकी ज्ञान ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रभावी प्रस्तुति, मजबूत बिजनेस मॉडल, वित्तीय योजना, बाजार की समझ और निवेशकों के समक्ष अपने विचारों को आत्मविश्वास के साथ प्रस्तुत करने की कला भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उप विकास आयुक्त रवि राकेश ने कहा कि आज का दौर नवाचार और उद्यमिता का है। बिहार सरकार स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं संचालित कर रही है, जिनका लाभ उठाकर युवा न केवल अपना भविष्य संवार सकते हैं, बल्कि दूसरों के लिए भी रोजगार के अवसर सृजित कर सकते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से नौकरी तलाशने के बजाय रोजगार सृजन की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया।

जिला उद्योग केंद्र, भागलपुर के महाप्रबंधक राकेश कुमार ने बिहार स्टार्टअप नीति, औद्योगिक विकास, वित्तीय सहायता, सरकारी प्रोत्साहन योजनाओं और उद्यम स्थापना की प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि जिला उद्योग केंद्र नए उद्यमियों को हर स्तर पर सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है। इस अवसर पर औद्योगिक विस्तार पदाधिकारी श्याम प्रकाश भी मौजूद रहे।

कार्यशाला के मुख्य वक्ता एवं पिच डेक विशेषज्ञ निक्की कुमार झा, संस्थापक Sabgikothi, ने बताया कि किसी भी स्टार्टअप की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि उसका संस्थापक अपने विचार को कितनी स्पष्टता और प्रभावी तरीके से निवेशकों के सामने प्रस्तुत करता है। उन्होंने पिच डेक तैयार करने की पूरी प्रक्रिया को सरल उदाहरणों के माध्यम से समझाते हुए समस्या, समाधान, बाजार की आवश्यकता, बिजनेस मॉडल, राजस्व स्रोत, प्रतिस्पर्धा, टीम और भविष्य की रणनीति जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की।

महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. बिमलेश कुमार ने कहा कि वर्तमान समय में तकनीकी शिक्षा के साथ नवाचार, अनुसंधान और उद्यमिता को बढ़ावा देना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि संस्थान विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक, शोध और स्टार्टअप संस्कृति से जोड़ने के लिए लगातार प्रयासरत है, ताकि वे वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप स्वयं को तैयार कर सकें।

स्टार्टअप सेल के फैकल्टी इंचार्ज डॉ. प्रभाकर कुमार ने SAYUJ प्लेटफॉर्म के माध्यम से उद्योग एवं शिक्षण संस्थानों के बीच सहयोग, नेटवर्किंग, रोजगार के अवसर और प्रतिभा विकास की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। वहीं, बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर की स्टार्टअप समन्वयक मेघा कुमारी ने प्री-इन्क्यूबेशन, इन्क्यूबेशन, मेंटरशिप, सरकारी सहायता और व्यवसाय विकास की प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी देते हुए युवाओं को अपने नवाचार को उद्यम का रूप देने के लिए प्रेरित किया।

जिला स्टार्टअप सेल के समन्वयक अभिषेक कुमार ने डिजिटल भुगतान प्रणाली, ऑनलाइन व्यवसाय संचालन और वित्तीय प्रबंधन को लेकर Razorpay Rize Programme की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि डिजिटल तकनीक आज स्टार्टअप्स की सफलता का महत्वपूर्ण आधार बन चुकी है।

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने विशेषज्ञों से सीधे संवाद कर स्टार्टअप निर्माण, इन्क्यूबेशन, फंडिंग, डिजिटल फाइनेंस, सरकारी योजनाओं तथा निवेशकों तक पहुंच बनाने से जुड़े कई प्रश्न पूछे, जिनका विशेषज्ञों ने विस्तार से उत्तर दिया।

कार्यशाला में भागलपुर अभियंत्रण महाविद्यालय के अलावा गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक भागलपुर, गवर्नमेंट आईटीआई भागलपुर तथा गवर्नमेंट विमेंस आईटीआई भागलपुर के छात्र-छात्राओं एवं शिक्षकों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम के सफल आयोजन में स्टूडेंट रिप्रेजेंटेटिव सनी शेखर एवं कैंपस टीवी टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों, विशेषज्ञों, अधिकारियों, शिक्षकों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया गया। आयोजकों ने कहा कि युवाओं में नवाचार, उद्यमिता और आत्मनिर्भरता की भावना को मजबूत करने के उद्देश्य से भविष्य में भी इस प्रकार की कार्यशालाओं का नियमित आयोजन किया जाएगा।

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