


पूर्णिया। बिहार विधानसभा के मानसून सत्र के चौथे दिन विधायक विजय खेमका ने शून्यकाल, ध्यानाकर्षण, तारांकित प्रश्न, याचिका एवं निवेदन के माध्यम से पूर्णिया सहित राज्य के विभिन्न जनहित से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे सदन में उठाए।
शून्यकाल के दौरान विधायक ने कहा कि राज्य की सरकारी बसों में यात्रियों को प्रमाणित एवं क्रमांकित टिकट उपलब्ध कराया जाता है, जबकि अधिकांश निजी बसों में केवल साधारण पर्ची दी जाती है। इससे दुर्घटना या अन्य आपात स्थिति में यात्रियों के अधिकार एवं दावों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने निजी बसों में भी सरकारी बसों की तर्ज पर प्रमाणित एवं क्रमांकित टिकट व्यवस्था लागू करने की मांग की।
ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से विधायक ने सरकारी शिक्षण संस्थानों में साप्ताहिक अवकाश तथा शिक्षकों की सेवानिवृत्ति आयु में व्याप्त असमानता का मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि बिहार राज्य मदरसा बोर्ड के अधीन शिक्षकों एवं कर्मियों की सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष है, जबकि सरकारी शिक्षण संस्थानों में यह 60 वर्ष निर्धारित है। उन्होंने शिक्षा मंत्री को पत्र देकर सभी शिक्षण संस्थानों में एक समान साप्ताहिक अवकाश तथा समान सेवानिवृत्ति आयु लागू करने की मांग की।
याचिका के माध्यम से विधायक ने पूर्णिया पूर्व प्रखंड के महाराजपुर पंचायत स्थित क्रय-विक्रय भवन, जहां आंगनवाड़ी केंद्र भी संचालित है, के शीघ्र जीर्णोद्धार की मांग की। वहीं, निवेदन के माध्यम से पूर्णिया नगर निगम के वार्ड संख्या-31 स्थित रामनगर प्रोफेसर कॉलोनी की गली संख्या-2 में बबलू चौरसिया के घर से रविंद्र जी के घर तक सड़क के पक्कीकरण का मामला उठाया।
तारांकित प्रश्न के माध्यम से विधायक ने पूर्णिया नगर निगम के वार्ड संख्या-4 स्थित बक्साघाट क्षेत्र में कारी कोसी नदी पर कथित अवैध पक्के पुल निर्माण का मुद्दा सदन में रखा। उन्होंने कहा कि यह मामला लंबे समय से प्रशासन के संज्ञान में होने के बावजूद अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है। उन्होंने राज्य स्तरीय समिति गठित कर पूरे मामले की गहन जांच कराने, अवैध निर्माण को शीघ्र हटाने तथा दोषी पदाधिकारियों एवं निर्माणकर्ताओं के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने की मांग की।
विधायक विजय खेमका ने कहा कि विधानसभा का मानसून सत्र भले ही अल्प अवधि का हो, लेकिन उनका प्रयास है कि सदन में अधिक से अधिक जनहित एवं लोकहित से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को प्रभावी ढंग से उठाकर उनके समाधान की दिशा में पहल की जाए।
















