


एक्सपेंशन ज्वाइंट में गैप बढ़ने की खबरों पर विभाग ने दी सफाई, जांच में स्थिति पूर्ववत पाई गई
भागलपुर ।
विक्रमशिला सेतु को लेकर सोशल मीडिया एवं विभिन्न माध्यमों में प्रसारित खबरों के बीच पथ निर्माण विभाग ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि सेतु पर छोटे एवं हल्के वाहनों का परिचालन पूरी तरह सुरक्षित है और पूर्व की भांति जारी रहेगा।
पथ निर्माण विभाग, बिहार के प्रबंध निदेशक ने बताया कि 3 मई 2026 की मध्यरात्रि में विक्रमशिला सेतु के पी-2 एवं पी-3 स्पैन के बीच 34 मीटर लंबा सस्पेंडेड भाग क्षतिग्रस्त हो गया था। इसके बाद विभागीय निर्देशानुसार सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) की टीम के सहयोग से क्षतिग्रस्त हिस्से पर बेली ब्रिज का निर्माण कराया गया।
उन्होंने बताया कि आईआईटी पटना द्वारा प्रस्तुत प्रारंभिक जांच प्रतिवेदन के आधार पर बीआरओ से अतिरिक्त सुरक्षा उपायों के तहत पी-5 से पी-1, पी-1 से पी-2, पी-2 से पी-3 तथा पी-3 से पी-4 के बीच कुल चार बेली ब्रिज का निर्माण कराया गया।
निर्माण कार्य के दौरान विशेषज्ञों द्वारा बैलेंस्ड कैंटीलीवर स्पैन के एक्सपेंशन ज्वाइंट की माप की गई थी। उस समय भागलपुर की ओर ज्वाइंट के बीच औसतन 90 से 100 मिलीमीटर तथा नवगछिया की ओर 40 से 50 मिलीमीटर का गैप पाया गया था।
बुधवार को कुछ मीडिया प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया पर एक्सपेंशन ज्वाइंट के बीच गैप बढ़ने संबंधी खबरें सामने आने के बाद विभाग ने तत्काल ड्रोन कैमरे, फोटोग्राफी एवं वीडियोग्राफी के माध्यम से सेतु का पुनः निरीक्षण कराया। साथ ही विभागीय अभियंताओं द्वारा स्थल पर जाकर पुनः मापी की गई।
जांच में पाया गया कि भागलपुर की ओर एक्सपेंशन ज्वाइंट का गैप अब भी औसतन 90 से 100 मिलीमीटर तथा नवगछिया की ओर 40 से 50 मिलीमीटर ही है, जो पूर्व में दर्ज स्थिति के अनुरूप है। किसी प्रकार की अतिरिक्त वृद्धि या संरचनात्मक बदलाव नहीं पाया गया।
पथ निर्माण विभाग ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान स्थिति में विक्रमशिला सेतु पर हल्के एवं छोटे वाहनों का परिचालन पूरी तरह सुरक्षित है और इसे निर्बाध रूप से जारी रखा जा सकता है। विभाग द्वारा सेतु की नियमित निगरानी की जा रही है तथा संरचना की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।
















