


प्रदीप विद्रोही
सुल्तानगंज। श्रावणी मेले में हर साल लाखों कांवड़िये सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंचते हैं, लेकिन इस बार एक शिवभक्त ने अपनी अनोखी साधना और अद्भुत संकल्प से सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। कंधों पर करीब 80 किलो वजनी कांवड़ उठाकर इस श्रद्धालु ने सुल्तानगंज से बाबाधाम की लगभग 105 किलोमीटर की यात्रा महज 18 घंटे में पूरी कर ली।
सबसे खास बात यह रही कि पूरी यात्रा के दौरान शिवभक्त मौन व्रत में रहे। रास्ते भर किसी से कोई बातचीत नहीं की। जो भी उनसे कुछ पूछता, वे सिर्फ एक ही शब्द कहते – बोल बम’। यही उनका जवाब था और यही उनकी भक्ति की पहचान।
भक्ति का ऐसा जुनून, जिसे देखकर लोग रुक गए
श्रावणी पथ पर जब श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की नजर इस विशाल कांवड़ पर पड़ी तो हर कोई ठिठक गया। भारी-भरकम कांवड़ को कंधे पर संतुलित करते हुए तेज गति से आगे बढ़ रहे शिवभक्त को देखने के लिए लोग रास्ते में रुकने लगे। कई लोगों ने उनका वीडियो बनाया, तो कुछ ने उन्हें प्रणाम कर आशीर्वाद लिया।
श्रद्धालुओं का कहना था कि सामान्य कांवड़ की तुलना में यह कांवड़ कई गुना अधिक भारी था, फिर भी शिवभक्त के चेहरे पर थकान नहीं, बल्कि बाबा भोलेनाथ के प्रति अटूट श्रद्धा दिखाई दे रही थी।
18 घंटे की कठिन तपस्या
सुल्तानगंज से बाबाधाम तक का सफर सामान्य रूप से पैदल पूरा करने में कई कांवड़ियों को दो से तीन दिन तक का समय लग जाता है। लेकिन इस शिवभक्त ने लगातार चलते हुए केवल 18 घंटे में बाबा बैद्यनाथ के दरबार तक पहुंचकर सभी को चौंका दिया।
रास्ते में उन्होंने न तो किसी से बातचीत की और न ही अपनी साधना को भंग होने दिया। उनके लिए पूरी यात्रा एक तपस्या की तरह थी, जिसमें हर कदम पर केवल भगवान शिव का स्मरण और ‘बोल बम’ का उद्घोष ही उनके साथ था।
श्रद्धा और संकल्प का बना आकर्षण:
श्रावणी मेले में हर साल अलग-अलग तरह की कांवड़ और अनोखे शिवभक्त चर्चा का विषय बनते हैं, लेकिन इस बार 80 किलो वजनी कांवड़ और मौन साधना के साथ 18 घंटे में पूरी की गई यात्रा लोगों के बीच खास चर्चा का केंद्र बन गई है।
बाबा बैद्यनाथ के दरबार में जलार्पण के बाद भी शिवभक्त ने अपनी साधना का क्रम नहीं तोड़ा। उनसे जब यात्रा, संकल्प या कठिनाई के बारे में पूछा गया, तब भी उनके मुख से केवल एक ही स्वर निकला – ‘बोल बम… बोल बम…’
















