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@ पूर्व कुलपतियों ने आयोजन को बताया अब तक का सबसे भव्य समारोह, शिक्षकों-कर्मियों के सम्मान से लेकर डिजिटल विश्वविद्यालय की दिशा में उठीं अहम मांगें

प्रदीप विद्रोही

भागलपुर। तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (टीएमबीयू) का 67वां स्थापना दिवस सिर्फ एक औपचारिक समारोह नहीं रहा, बल्कि यह विश्वविद्यालय की परंपरा, उपलब्धियों और भविष्य की नई सोच का मंच बन गया। पहली बार ऐसा देखने को मिला जब एक ही मंच पर विश्वविद्यालय के सभी संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष, प्राचार्य, अधिकारी, सेवानिवृत्त शिक्षक-कर्मी और मेधावी छात्र-छात्राओं को समान सम्मान के साथ केंद्र में रखा गया।
समारोह का उद्घाटन पूर्व कुलपति प्रो. ए.के. राय, पूर्व प्रभारी कुलपति प्रो. क्षेमेन्द्र कुमार और अध्यक्षता कर रहे प्रो. सुदामा यादव ने दीप प्रज्वलित कर किया। पूरे कार्यक्रम में विश्वविद्यालय परिवार की एकजुटता और संस्थान को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का संकल्प स्पष्ट दिखाई दिया।
पूर्व प्रभारी कुलपति प्रो. क्षेमेन्द्र कुमार ने कहा कि वर्ष 1965 से विश्वविद्यालय को देखते आ रहे हैं, लेकिन स्थापना दिवस का इतना भव्य और सुव्यवस्थित आयोजन उन्होंने पहली बार देखा। उन्होंने इसे आयोजन समिति की मेहनत और दूरदर्शी सोच का परिणाम बताया।
मुख्य अतिथि प्रो. ए.के. राय ने विश्वविद्यालय को ‘मां’ की संज्ञा देते हुए कहा कि स्थापना दिवस आत्ममंथन का अवसर है। उन्होंने कहा कि शिक्षक और गैर-शिक्षण कर्मी ही विश्वविद्यालय की असली ताकत हैं और शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखना सभी की साझा जिम्मेदारी है। साथ ही स्कूलों में महाविद्यालय खोलने की प्रवृत्ति पर उन्होंने गंभीर चिंता भी जताई।
स्थापना दिवस का सांस्कृतिक रंग भी बेहद आकर्षक रहा। बी.एन. कॉलेज, मारवाड़ी कॉलेज, सबौर कॉलेज, टी.एन.बी. कॉलेज और एस.एम. कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने लोकनृत्य, संगीत और नाट्य प्रस्तुतियों से भारतीय संस्कृति और ज्ञान परंपरा की जीवंत झलक पेश की, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा।
कार्यक्रम में विभिन्न स्नातकोत्तर विभागों और महाविद्यालयों के टॉपर छात्र-छात्राओं को मेडल और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। वहीं 31 विभागाध्यक्षों, अंगीभूत, संबद्ध एवं राजकीय महाविद्यालयों के प्राचार्यों के साथ-साथ पिछले एक वर्ष में सेवानिवृत्त हुए शिक्षकों और गैर-शैक्षणिक कर्मियों को भी विशेष सम्मान दिया गया। यह सम्मान समारोह पूरे आयोजन का सबसे भावुक क्षण साबित हुआ।
स्थापना दिवस केवल सम्मान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विश्वविद्यालय के भविष्य की रूपरेखा भी सामने आई। सिंडिकेट सदस्य मुश्फिक आलम ने नए प्रशासनिक भवन, सभी विभागों के पूर्ण डिजिटलाइजेशन और प्रतिनियुक्त शिक्षकों की वापसी की मांग उठाई। दर्शनशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो. पुरणेंदु शेखर ने डॉ. राजेंद्र प्रसाद की प्रतिमा स्थापना, कुलगीत से जुड़े रचनाकारों के सम्मान और फाइल ट्रैकिंग की डिजिटल व्यवस्था की आवश्यकता बताई। वहीं प्राचार्य प्रो. दीपो महतो ने विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय पहचान दिलाने का संकल्प दोहराया और प्रो. बी.बी. तिवारी ने प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने के लिए अधिकारियों के नियमित प्रशिक्षण पर जोर दिया।
सांस्कृतिक परिषद के सचिव डॉ. राहुल कुमार के नेतृत्व में आयोजित इस समारोह का संचालन डॉ. संजय कुमार जायसवाल ने किया। अंत में अनिरुद्ध कुमार ने सभी अतिथियों, शिक्षकों, कर्मियों, विद्यार्थियों और मीडिया प्रतिनिधियों के प्रति आभार व्यक्त किया। सामूहिक राष्ट्रगान के साथ संपन्न हुआ यह आयोजन टीएमबीयू के इतिहास में एक नई और यादगार शुरुआत के रूप में दर्ज हो गया।

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