


कर्बला के शहीदों को दी गई श्रद्धांजलि
नवगछिया। इस्लामिक कैलेंडर के प्रथम और सबसे पवित्र महीने मुहर्रम के अवसर पर नवगछिया के मुमताज मोहल्ला में श्रद्धा, अकीदत और शांतिपूर्ण वातावरण के बीच यौम-ए-आशूरा मनाया गया। इस अवसर पर हजरत इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों की कुर्बानी को याद करते हुए लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की तथा अमन, भाईचारे और इंसानियत का संदेश दिया।
मुहर्रम इस्लाम के चार पवित्र महीनों में शामिल है। यह महीना इस्लामिक नववर्ष (हिजरी संवत) की शुरुआत का प्रतीक होने के साथ-साथ सत्य, न्याय, त्याग और मानवता की रक्षा के लिए दी गई महान कुर्बानी की याद भी दिलाता है। लगभग 1400 वर्ष पूर्व इराक के कर्बला में हजरत इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों ने अत्याचार और अन्याय के आगे झुकने के बजाय शहादत स्वीकार की थी। उनकी यही कुर्बानी आज भी पूरी दुनिया के लोगों को सत्य और इंसाफ के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।
मुहर्रम की 10वीं तारीख, जिसे यौम-ए-आशूरा कहा जाता है, विशेष महत्व रखती है। इस दिन शिया समुदाय के लोग हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में मातमी जुलूस निकालते हैं और गम का इजहार करते हैं, जबकि सुन्नी समुदाय के लोग रोजा रखकर इबादत करते हैं तथा इंसानियत, सब्र और भाईचारे का संदेश देते हैं।
नवगछिया के मुमताज मोहल्ला में भी मुहर्रम पूरे अनुशासन और शांतिपूर्ण वातावरण में मनाया गया। क्षेत्र में आपसी सौहार्द और भाईचारे का माहौल देखने को मिला। लोगों ने कर्बला के शहीदों को याद करते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के दौरान अमन-चैन, सामाजिक एकता और देश की खुशहाली के लिए विशेष दुआएं भी की गईं।
इस अवसर पर नागरिक विकास समिति के सदस्य जफर अंसारी, शौकत अंसारी, प्रो. अतहर अंसारी, शाहिद अंसारी, सोहेल अंसारी, वाहिद अंसारी सहित बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे। सभी ने मुहर्रम के संदेश—सत्य, न्याय, त्याग, धैर्य और इंसानियत—को समाज तक पहुंचाने का आह्वान किया।















