


प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। पीरपैंती पावर प्लांट से जुड़ी बहुप्रतीक्षित रेल-सह-सड़क कॉरिडोर परियोजना ने अहम पड़ाव पार कर लिया है। भू-अर्जन विभाग ने 161.01 एकड़ भूमि अधिग्रहण की अधिघोषणा जारी कर दी है। इसके साथ ही परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण का रास्ता साफ हो गया है और अब रेलवे कॉरिडोर व सड़क निर्माण की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है।
परियोजना के तहत पीरपैंती अंचल के सात मौजों -खिदरपुर, इमामनगर, बसंतपुर, ककरघट, हरिणकोल, महेशराम और चौधरी बसंतपुर की कुल 161.01 एकड़ भूमि अधिग्रहित की जाएगी। सबसे अधिक 65.992 एकड़ भूमि बसंतपुर और 56.4686 एकड़ हरिणकोल से ली जाएगी।
इस अधिग्रहण से कुल 501 रैयत प्रभावित होंगे। इनमें बसंतपुर के 191, हरिणकोल के 165, खिदरपुर के 69, ककरघट के 31, इमामनगर के 24, चौधरी बसंतपुर के 13 और महेशराम के 8 रैयत शामिल हैं। भू-अर्जन विभाग ने स्पष्ट किया है कि प्राप्त आपत्तियों की सुनवाई और नियमानुसार जांच के बाद ही अधिघोषणा जारी की गई है।
राहत की बात यह है कि इस परियोजना में किसी भी परिवार का विस्थापन नहीं होगा। प्रभावित रैयतों को भूमि के बदले नियमानुसार मुआवजा और अन्य वैधानिक लाभ दिए जाएंगे।
पांच किलोमीटर लंबा होगा कॉरिडोर:
प्रस्तावित रेल-सह-सड़क कॉरिडोर की लंबाई करीब 5 किलोमीटर और चौड़ाई 120 मीटर होगी। यह लक्ष्मीपुर होरंग हाल्ट से शुरू होकर सुंदरपुर गांव तक जाएगा। रेलवे लाइन के जरिए कोयला सीधे पावर प्लांट तक पहुंचेगा, जबकि सड़क का उपयोग पावर प्लांट के साथ-साथ आम लोगों के आवागमन के लिए भी होगा।
बदल सकती है इलाके की तस्वीर:
सामाजिक प्रभाव मूल्यांकन रिपोर्ट के अनुसार यह परियोजना क्षेत्र के विकास में अहम भूमिका निभाएगी। बेहतर सड़क संपर्क, रोजगार के नए अवसर, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक आसान पहुंच तथा ऊर्जा उपलब्धता बढ़ने से औद्योगिक गतिविधियों को भी गति मिलने की संभावना है। निर्माण और संचालन के दौरान स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।
एक नजर में परियोजना
भूमि अधिग्रहण: 161.01 एकड़
प्रभावित मौजे: 7
प्रभावित रैयत: 501
कॉरिडोर लंबाई: 5 किमी
चौड़ाई: 120 मीटर
विशेषता: बिना विस्थापन भूमि अधिग्रहण, मुआवजा व वैधानिक लाभ सुनिश्चित
















