


प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। महात्मा गांधी के भागलपुर आगमन के 100 वर्ष पूरे होने पर शहर में एक नई बहस शुरू हो गई है। सवाल यह है कि जब समाहरणालय परिसर में गांधी चबूतरा और दीवार पर बापू का विशाल चित्र मौजूद है, तो उनकी प्रतिमा अब तक क्यों नहीं लगाई गई? इसी मुद्दे को लेकर शहर के गांधीवादी, सामाजिक कार्यकर्ता, साहित्यकार और पत्रकार एक मंच पर आ गए हैं।

महात्मा गांधी के भागलपुर आगमन की शताब्दी वर्ष के अवसर पर समाहरणालय परिसर स्थित गांधी चबूतरा पर बापू की प्रतिमा स्थापित करने की मांग तेज हो गई है। इस संबंध में जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा गया है, जिसमें कहा गया है कि गांधी चबूतरा अपनी पहचान तभी पूर्ण करेगा, जब वहां महात्मा गांधी की प्रतिमा स्थापित होगी।
यह मांग वरिष्ठ पत्रकार प्रसून लतांत और अंग जन गण के अध्यक्ष डॉ. सुधीर मंडल की पहल पर उठाई गई है। ज्ञापन पर अधिवक्ता त्रिलोकीनाथ दिवाकर, ओंकार नाथ दिवाकर और सामाजिक कार्यकर्ता सुबोध मंडल सहित कई लोगों के हस्ताक्षर हैं।
मांगकर्ताओं का कहना है कि भागलपुर में गांधी जी के नाम पर सड़क तो है, लेकिन शहर के किसी प्रमुख सार्वजनिक स्थल पर उनकी प्रतिमा नहीं है। तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के गांधी विचार विभाग में प्रतिमा जरूर है, लेकिन वह आम नागरिकों की पहुंच से दूर है। वहीं गांधी शांति प्रतिष्ठान केंद्र में भी बापू की प्रतिमा का अभाव खलता है।
इधर, गांधी आगमन शताब्दी समारोह समिति की ओर से 7 से 9 अगस्त तक राष्ट्रीय स्तर पर तीन दिवसीय आयोजन प्रस्तावित है। इसमें सद्भावना यात्रा, संगीत संध्या, कवि सम्मेलन, रक्तदान शिविर, स्वच्छता अभियान और स्मारिका प्रकाशन जैसे कार्यक्रम होंगे।
सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि यदि इसी अवसर पर गांधी चबूतरा पर बापू की प्रतिमा लगाने की घोषणा हो जाए, तो यह शताब्दी वर्ष की सबसे बड़ी और स्थायी उपलब्धि होगी। उनका कहना है कि 2 अक्टूबर 1925 को भागलपुर आए महात्मा गांधी की स्मृति को सम्मान देने का इससे उपयुक्त समय नहीं हो सकता।
















