


प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। अगर आपके घर की पुरानी संदूक, अलमारी या बक्से में दादा-परदादा के जमाने का कैडस्ट्रल सर्वे (CS) खतियान रखा है, तो अब वह सिर्फ आपका दस्तावेज नहीं, बल्कि सरकार के लिए भी कीमती रिकॉर्ड बन गया है।
बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने एक अनोखी अपील जारी की है। विभाग ने स्वीकार किया है कि भागलपुर जिले के 1004 मौजों के कैडस्ट्रल सर्वे (CS) खतियान उसके अभिलेखों में उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में अब सरकार आम रैयतों से अनुरोध कर रही है कि यदि उनके पास इन मौजों के पुराने खतियान सुरक्षित हैं, तो उन्हें स्कैनिंग के लिए संबंधित अंचल कार्यालय या राजस्व अभिलेखागार में उपलब्ध कराएं, ताकि भविष्य के लिए उनका डिजिटल संरक्षण किया जा सके।
सरकारी रिकॉर्ड में खाली जगह, जनता से उम्मीद
आमतौर पर लोग अपने जमीन के कागजात खोजने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाते हैं। लेकिन इस बार तस्वीर उलट गई है। सरकार खुद जनता के दरवाजे पर दस्तावेज तलाश रही है।
यह अपील बताती है कि दशकों पुराने भूमि अभिलेखों का एक बड़ा हिस्सा सरकारी रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं है। ऐसे में जिन परिवारों ने अपने पूर्वजों के दस्तावेज सुरक्षित रखे हैं, वे अब सरकारी अभिलेखों को फिर से समृद्ध बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
किन अंचलों में सबसे अधिक खतियान गायब:
विभाग के अनुसार सबसे अधिक अनुपलब्ध कैडस्ट्रल सर्वे खतियान कहलगांव अंचल के 206 मौजों के हैं। इसके बाद सन्हौला (149), सुल्तानगंज (119), शाहकुंड (99), पीरपैंती (78) और जगदीशपुर सदर (75) का स्थान है।
इसके अलावा नाथनगर (49), बिहपुर (42), सबौर (40), खरीक (35), नारायणपुर (31), नवगछिया (27), गोपालपुर (18), इस्माइलपुर (15), रंगरा चौक (12) और गोराडीह (9) मौजों के खतियान भी विभाग के रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं हैं।
क्यों महत्वपूर्ण है CS खतियान:
कैडस्ट्रल सर्वे (CS) खतियान भूमि का सबसे पुराना और मूल अभिलेख माना जाता है। कई बार जमीन के स्वामित्व, सीमांकन, वंशानुगत अधिकार और पुराने विवादों के समाधान में यही दस्तावेज सबसे अहम साक्ष्य बनता है। इसलिए इसका सुरक्षित रहना न केवल रैयतों, बल्कि पूरे राजस्व तंत्र के लिए महत्वपूर्ण है।
सरकार की अपील:
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने नागरिकों से आग्रह किया है कि यदि उनके पास सूचीबद्ध मौजों का कैडस्ट्रल सर्वे (CS) खतियान उपलब्ध है, तो उसे संबंधित अंचल कार्यालय या राजस्व अभिलेखागार में स्कैनिंग के लिए उपलब्ध कराएं। इससे मूल दस्तावेज सुरक्षित रहेगा और उसका डिजिटल रिकॉर्ड भी तैयार हो सकेगा।
सरकार का संदेश स्पष्ट है- ‘स्पष्ट भू-संपदा, सुशासन, समृद्धि से शांति सर्वदा।’
अब सवाल यह है कि क्या सरकार के अभिलेखों में खोया इतिहास जनता की अलमारियों और संदूकों से वापस मिल पाएगा। यदि ऐसा हुआ, तो यह सिर्फ पुराने कागजों की वापसी नहीं होगी, बल्कि बिहार के भूमि रिकॉर्ड को भविष्य के लिए सुरक्षित करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकता है।

















