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@ कवि, गीतकार, और गायकी जैसे हुनर से संपन्न अर्पिता अंगिका के प्रति अपनी रुचि को लेकर कहती हैं – अक्सर मुझे यह सोचकर टीस होती है कि जब नानी, दादी इस दुनिया में नहीं रहेंगी, तो उत्सव-महोत्सव और शादी-विवाह में हमारे संस्कार गीत कौन गाएगा. लगभग लुप्त हो चुके संस्कार गीतों को मैं भविष्य में जीवित देखना चाहती हूं. इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए अर्पिता प्रदेश के संस्कार गीतों को अंगिका में ढालकर उन्हें अपनी मिट्टी की भाषा में मंच देने का प्रयास कर रही हैं.

प्रदीप विद्रोही

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भागलपुर. इन दिनों भागलपुर यानी अंग की कवि व गीतकार अर्पिता चौधरी अंगिका गीतों को अपनी सुमधुर आवाज देकर खूब नाम कमा रही है. उत्सव, महोत्सव के दौरान अंग में होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों में इसकी उपस्थिति धमाल मचा रही है. मंचों पर तो इनकी आवाज का जादू श्रोताओं को दीवाना बना देता है. इसकी इसी खूबी की वजह से भागलपुर रेडियो स्टेशन में युववाणी कंपेयर के पद पर इनका चयन हुआ है. महज बीस वर्ष की और पिछले करीब सात वर्षों से गायकी से जुड़ी अंग कोकिला अर्पिता के हिस्से में पुरस्कारों की लंबी फेहरिस्त आ चुकी है. अभी तक तीस से भी अधिक पुरस्कार व सम्मान अपनी झोली में कर चुकी है. जिसे कलांतर में वह जारी रखना चाह रही है.अर्पिता कहती है. सामाजिक स्तर पर जो भी घटनाएं होती है, उसको मैं गीत के रूप में कलमवद्ध करती हूं. फिर हारमोनियम पर उसको गाती हूं.
भागलपुर के गोनुधाम बरडीहा गांव निवासी माता कर्मवती और पिता मनोज चौधरी की लाडली अर्पिता बचपन से ही गुनगुनाने की शौकीन थीं. दादी और मां के भजन सुनकर गाने की प्रेरणा मिली. जिसके बाद उन्होंने संगीत की शिक्षा गुरु लालमोहन साह व विनय शुक्ला से ली. एसएम कॉलेज भागलपुर में अंग्रेजी ऑनर्स की छात्रा अर्पिता अंगिका के प्रति अपनी लगन को बताते हुए कहती हैं, यह ख्याल मुझे अक्सर बेचैन करता है कि भविष्य में हमारे पारंपरिक संस्कार गीत विलुप्त न हो जाएं. इसलिए मैं इन गीतों को अंगिका में प्रस्तुत करके अपनी मिट्टी की भाषा को एक नया फलक देने का प्रयास कर रही हूं.
अर्पिता अंगिका गीतों का चयन बहुत सोच-समझ कर करती हैं. उनकी रुचि विशेष रूप से ग्रामीण परिवेश के संस्कार गीतों को पुनर्जीवित करने में है. इसके अलावा, वे उन गीतों को भी अपनी आवाज देती हैं जिनमें घर-समाज, प्रकृति, और भक्ति रस की झलक होती है. हाल ही में जिला उत्सव के दौरान काव्य पाठ में अपनी मौलिक रचना जे सब नै मिलतै बहार म, ऊ सब मिलतै हमरो बिहार म… की प्रस्तुति देकर प्रथम स्थान प्राप्त किया.
अर्पिता अंगिका गीतों व अपनी मौलिक कविताओं का मंचों के अलावा दूरदर्शन और रेडियो पर भी प्रदर्शन करती रहती हैं. अपनी प्रस्तुति को सोशल मीडिया पर भी साझा करती हैं, जहां उन्हें भरपूर सराहना और आशीर्वाद मिलता है. पिछले कुछ वर्षों में वे सरकारी और गैर-सरकारी मंचों पर कजरी, सावन, विवाह, विदाई, कन्यादान, मुंडन, उपनयन, श्रावणी, दुर्गा-काली मैया, भोला बाबा आदि गीतों के साथ लोकप्रियता के शिखर पर पहुंच चुकी हैं. उनके सुरों से अंगिका का मान और बढ़ा है. कई प्रसिद्ध अंगिका कवियों और गीतकारों के गीतों को स्वर देकर उन्होंने अपनी पहचान बनाई है.इनकी शब्द शब्द शहद सी मीठी जुबान से अब तक अंगिका के लोकप्रिय गीतकारों जैसे कवि डॉ. अमरेंद्र, डॉ. आलोक प्रेमी, लक्ष्मी नारायण मधुलक्ष्मी, सुधीर कुमार प्रोग्रामर, मंजीत सिंह किनवार, कुमार गौरव, मुरारी मिश्रा सहित दर्जनों अंगिका के गीतकारों के सुमधुर गीतों को स्वर मिल चुका है. इनके आशीर्वाद से ही अर्पिता लगातार आगे बढ़ रही है.

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