


नवगछिया। कला भवन साहित्य विभाग की मासिक संगोष्ठी के अंतर्गत रविवार को कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की 146वीं जयंती समारोहपूर्वक मनाई गई। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं मुंशी प्रेमचंद के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया।

मुख्य अतिथि बी. झा कॉलेज के प्राचार्य एवं वरिष्ठ कथाकार डॉ. संजय कुमार सिंह ने कहा कि प्रेमचंद की कहानियों में भारत की आत्मा का निवास है। उन्होंने हिंदी कथा साहित्य को नई दिशा दी और किसान, मजदूर, स्त्री तथा दलित वर्ग के जीवन को अपनी रचनाओं का केंद्र बनाया। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य आज भी उतना ही प्रासंगिक है, क्योंकि उसमें समाज का यथार्थ और मानवीय संवेदनाएं जीवंत रूप से मौजूद हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं साहित्य विभाग की संयोजिका डॉ. निरुपमा राय ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि बदलते सामाजिक परिवेश में प्रेमचंद की कहानियों का पुनर्पाठ समय की आवश्यकता है। उन्होंने प्रेमचंद को कथाकारों की प्रेरणा बताया।

विशिष्ट अतिथि डॉ. प्रभात नारायण झा ने कहा कि प्रेमचंद ने पहली बार भारतीय समाज के वास्तविक जीवन को कहानी का विषय बनाया। उनके साहित्य में देश की आत्मा और भारतीय किसानों का जीवन मुखर रूप से दिखाई देता है। वहीं डॉ. शिवमुनि यादव ने कहा कि प्रेमचंद ने निर्भीक होकर सामाजिक यथार्थ का चित्रण किया और उनके विचारों का अनुसरण ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
डॉ. उषा शरण ने प्रेमचंद के गांव लमही की यात्रा का अनुभव साझा करते हुए कहा कि उनका साहित्य नई पीढ़ी में संवेदना जगाने की क्षमता रखता है। डॉ. के.के. चौधरी ने कहानी ‘मंत्र’ की व्याख्या करते हुए प्रेमचंद को “कलम का सिपाही” बताया। महेश विद्रोही ने ‘दो बैलों की कथा’ के माध्यम से प्रेमचंद की सामाजिक दृष्टि पर प्रकाश डाला।
इस अवसर पर श्रीमती मीना सिंह, सुनील समदर्शी, छाया जोशी, मनोज कुमार राय, डॉ. निशा प्रकाश, वंदना कुमारी, ललिता कुमारी एवं विमल कुमार सहित कई साहित्यकारों ने सामाजिक सरोकारों से जुड़ी कविताओं का पाठ किया। कार्यक्रम में मुकेश कुमार, मलय कुमार झा, विपिन सिंह, मिथिलेश राय, अमित कुमार झा सहित अनेक साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे। अंत में संयोजिका डॉ. निरुपमा राय ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
















