


प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। कहलगांव के NH80 पर स्थित कोवा नदी पर बना 1961 ई का पुल आज सरकारी उपेक्षा की कहानी बयां कर रहा है। साढ़े छह दशक से अधिक पुराने इस पुल की समय रहते न तो मरम्मत हुई और न ही इसकी मजबूती की जांच कराई गई। अब जब पुल पूरी तरह जर्जर हो चुका है तो प्रशासन ने मरम्मत के नाम पर छोटी-बड़ी सभी प्रकार की वाहनों की आवाजाही पर रोक लगा दी है। इसका सबसे बड़ा खामियाजा हजारों स्कूली बच्चों और आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है। वहीं पुल पर जाम के झाम में राहगीर घंटों कराहता रहा। बंद के पहले दिन स्कूली बच्चों के
अभिभावकों ने जमकर अपने गुस्से का इजहार किया। वहीं एनएच 80 के निर्माण के वक़्त भी इस जर्जर पुल की सरकार ने सुध नहीं ली। इसे अपने हाल पर छोड़ दिया गया। आगामी पांच अगस्त को कहलगांव से निकलने वाली एतिहासिक पड़ाव संघ की कांवर यात्रा भी इसी रास्ते से गुजरेगी।जिसमें दर्जनों वाहनों का काफिला साथ चलता है। पुल बंद होने के बाद करीब 10 हजार से अधिक छात्र-छात्राएं रोजाना कई किलोमीटर पैदल चलकर अपने-अपने स्कूल पहुंचने को मजबूर हैं। यह दर्द पता नहीं कब तक रहेगा। कहलगांव शहर और घोघा सहित आसपास के ग्रामीण इलाके के स्कूली बच्चों के लिए अब परेशानी बढ़ गई है। सुबह स्कूल जाने और दोपहर घर लौटने के दौरान बच्चों को कड़ी धूप, बारिश और थकान का सामना करना पड़ रहा है। अभिभावकों की चिंता भी बढ़ गई है, क्योंकि छोटे बच्चों को पैदल लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है।
सिर्फ विद्यार्थी ही नहीं, बल्कि नौकरीपेशा लोग, किसान, व्यापारी, मरीज और रोजमर्रा के काम से आने-जाने वाले हजारों लोगों की परेशानी भी कई गुना बढ़ गई है। पुल बंद होने के कारण लोगों को या तो पैदल सफर करना पड़ रहा है या फिर लंबा चक्कर लगाकर गंतव्य तक पहुंचना पड़ रहा है, जिससे समय और पैसे दोनों की अतिरिक्त बर्बादी हो रही है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुल की हालत एक-दो साल में नहीं बिगड़ी, बल्कि वर्षों से इसकी स्थिति खराब होती जा रही थी। इसके बावजूद संबंधित विभाग और सरकार ने समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया। नियमित रखरखाव और मरम्मत होती रहती तो शायद आज पुल बंद करने की नौबत नहीं आती।
ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन ने पुल पर वाहनों की आवाजाही तो बंद कर दी, लेकिन लोगों के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की। न अस्थायी पुल बनाया गया और न ही आवागमन के लिए कोई दूसरी सुविधा उपलब्ध कराई गई। ऐसे में पूरे क्षेत्र के लोगों का जनजीवन प्रभावित हो गया है।
लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि पुल की मरम्मत युद्धस्तर पर कराई जाए और काम पूरा होने तक आवागमन के लिए वैकल्पिक मार्ग या अस्थायी पुल की व्यवस्था की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि विकास के दावों के बीच एक पुल बंद होने से हजारों लोगों का जीवन प्रभावित होना व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

((((( बॉक्स खबर )))))
हल्के वाहनों के लिए दिनभर, भारी वाहनों के लिए रात 9 बजे से सुबह 6 बजे तक अलग मार्ग निर्धारित
भागलपुर। कोवा नदी पुल पर मरम्मत कार्य के चलते वाहनों की आवाजाही बंद रहने के कारण जिला प्रशासन ने लोगों की सुविधा के लिए हल्के और भारी वाहनों हेतु वैकल्पिक मार्ग निर्धारित किया है। प्रशासन ने लोगों से निर्धारित रूट का पालन करने और अनावश्यक रूप से बंद पुल की ओर नहीं जाने की अपील की है।
प्रशासन की ओर से जारी आदेश के अनुसार हल्के वाहन भागलपुर (जीरोमाइल) से पीरपैंती जाने के लिए भागलपुर (जीरोमाइल), चौधा, पोधा मोड़, स्टेट हाईवे-84, दोगच्छी ताहर मोड़, एनएच-80 (फोर लेन) होते हुए पीरपैंती पहुंचेंगे।
वहीं पीरपैंती से भागलपुर आने वाले हल्के वाहन पीरपैंती, एनएच-80 (फोर लेन), दोगच्छी ताहर मोड़, स्टेट हाईवे-84, घोघा मोड़, घोघा होते हुए भागलपुर (जीरोमाइल) पहुंचेंगे।
भारी वाहनों के लिए भी प्रशासन ने अलग वैकल्पिक रूट निर्धारित किया है। रात्रि 9 बजे से सुबह 6 बजे तक भागलपुर से पीरपैंती जाने वाले भारी वाहन भागलपुर बाइपास (एनएच-80), जगदीशपुर, कोतवाली, सन्हौला चौक, हनवारा, नयानगर, महगामा (केंचुआ चौक), ललमटिया, बाराहाट होते हुए पीरपैंती जाएंगे।
इसी प्रकार पीरपैंती से भागलपुर आने वाले भारी वाहन रात्रि 9 बजे से सुबह 6 बजे तक पीरपैंती, बाराहाट, ललमटिया, महगामा (केंचुआ चौक), नयानगर, हनवारा, सन्हौला चौक, कोतवाली, जगदीशपुर होते हुए भागलपुर बाइपास (एनएच-80) के रास्ते अपने गंतव्य तक पहुंचेंगे।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि पुल की मरम्मत पूरी होने तक यही वैकल्पिक व्यवस्था लागू रहेगी। साथ ही वाहन चालकों से यातायात नियमों का पालन करने तथा निर्धारित मार्ग का ही उपयोग करने की अपील की गई है, ताकि आवागमन सुचारु बना रहे और किसी प्रकार की असुविधा या दुर्घटना की स्थिति उत्पन्न न हो।

















