


भागलपुर। शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं, बल्कि नेतृत्व, आत्मविश्वास और सामाजिक जागरूकता का माध्यम भी बन सकती है। इसी सोच के साथ समवेत संस्था पिछले कई वर्षों से आठ गांवों में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति समुदाय की किशोरियों के लिए प्रेरणा केंद्र संचालित कर रही है। इन केंद्रों के माध्यम से किशोरियों को शिक्षा के साथ जीवन कौशल, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक बनाया जा रहा है।

प्रेरणा केंद्रों में नियमित पढ़ाई के अलावा जेंडर समानता, बाल अधिकार, नेतृत्व विकास, जीवन कौशल, सामूहिक संवाद, नाटक, खेल, गीत-संगीत और रचनात्मक गतिविधियों का आयोजन किया जाता है। इन गतिविधियों का उद्देश्य किशोरियों में सोचने, प्रश्न करने, निर्णय लेने और आत्मविश्वास के साथ अपनी बात रखने की क्षमता विकसित करना है।
किशोरियों को समसामयिक घटनाओं से जोड़ने के लिए प्रत्येक केंद्र में दैनिक समाचार पत्र उपलब्ध कराए गए हैं। इससे वे अपने गांव से निकलकर जिला, राज्य, देश और दुनिया की महत्वपूर्ण घटनाओं, विज्ञान, शिक्षा, खेल और समाज में हो रहे बदलावों की जानकारी प्राप्त कर रही हैं। संस्था का मानना है कि अखबार किशोरियों के लिए दुनिया को समझने का प्रभावी माध्यम बन रहे हैं।

डिजिटल युग में मोबाइल पर बढ़ती निर्भरता के बीच समवेत ने प्रेरणा केंद्रों में क्रिएटिव राइटिंग की शुरुआत भी की है। इसके तहत किशोरियों को कविता, कहानी, संस्मरण और लेख लिखने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि वे अपने अनुभवों और विचारों को अभिव्यक्त कर सकें। संस्था इन रचनाओं का संकलन कर किशोरियों की एक पत्रिका प्रकाशित करने की तैयारी में भी जुटी है।
संस्था के अनुसार, इन प्रयासों का सकारात्मक परिणाम सामने आ रहा है। वर्तमान में लगभग सभी किशोरियां विद्यालय, प्लस-टू या कॉलेज से जुड़ी हैं। वे अपने अधिकारों के प्रति पहले से अधिक जागरूक हैं और आवश्यकता पड़ने पर 1098 तथा 112 जैसी हेल्पलाइन सेवाओं की जानकारी का उपयोग भी कर रही हैं। साथ ही वे अपने भविष्य के साथ समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की जिम्मेदारी भी महसूस कर रही हैं।
समवेत का कहना है कि नेतृत्व केवल भाषण देने से नहीं, बल्कि पढ़ने, सोचने, सवाल पूछने, लिखने और समाज के प्रति संवेदनशील बनने से विकसित होता है। प्रेरणा केंद्र इसी सोच को साकार करते हुए ऐसी युवा नेतृत्वकारी पीढ़ी तैयार करने की दिशा में कार्य कर रहे हैं, जो समानता, न्याय और लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ समाज के विकास में सक्रिय भूमिका निभा सके।
















