


बरुण बाबुल, जीएस न्यूज
नवगछिया. वर्षों से सड़कों पर भटक रही मानसिक रूप से अस्वस्थ बताई जा रही एक युवती शुक्रवार को सड़क किनारे मां बनी, लेकिन बच्चे के जन्म के कुछ ही देर बाद उसकी जिंदगी खत्म हो गई. नवगछिया थाना क्षेत्र के पकड़ा आचार्य टोला, लक्ष्मीपुर गोसाईं गांव चौक के समीप हुई इस घटना ने पूरे इलाके को झकझोर दिया.
पेड़ के नीचे दिया बच्चे को जन्म, फिर हुई दर्दनाक घटना

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, युवती को शुक्रवार शाम सड़क किनारे एक पेड़ के नीचे प्रसव पीड़ा हुई. कुछ ही देर में उसने नवजात को जन्म दिया. इसके बाद उसने नवजात को जमीन पर पटक दिया, जिससे उसकी मौत हो गई. घटना के बाद भी वह मृत नवजात को अपनी बांहों में लेकर काफी देर तक इधर-उधर घूमती रही. यह दृश्य देखकर मौके पर मौजूद लोग स्तब्ध रह गये.
दो-तीन वर्षों से सड़कों पर भटक रही थी युवती
स्थानीय लोगों के अनुसार, युवती पिछले दो-तीन वर्षों से नवगछिया बाजार, एनएच-31, जीरोमाइल, बस स्टैंड और मकनपुर चौक समेत कई इलाकों में भटकती देखी जाती रही है. उसका कोई स्थायी ठिकाना नहीं था. लोग उसे समय-समय पर खाना और कपड़े देते थे, लेकिन उसके इलाज और पुनर्वास की स्थायी व्यवस्था नहीं हो सकी.
गर्भवती होने के बाद भी नहीं मिला स्थायी संरक्षण
स्थानीय लोगों के अनुसार, कुछ महीने पहले युवती के गर्भवती होने की जानकारी सामने आयी थी. उसकी मानसिक स्थिति को देखते हुए उसके साथ किसी तरह के शोषण की आशंका भी जतायी गयी थी, हालांकि इसकी अब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है.
पहले भी इलाज के लिए अस्पताल ले जाने का हुआ था प्रयास
बताया गया कि वर्ष 2025 में प्रशासन की ओर से भी युवती को इलाज के लिए अस्पताल ले जाने का प्रयास किया गया था, लेकिन वह वहां से निकलकर दोबारा सड़कों पर आ गयी थी. इसके बाद भी उसके स्थायी संरक्षण, इलाज और पुनर्वास की व्यवस्था नहीं हो सकी. पिछले कुछ समय से उसे पुलिस अधीक्षक आवास के समीप स्थित एक खंडहर में भी देखा जाता था.
पुलिस ने युवती को अस्पताल में कराया भर्ती
घटना की सूचना मिलने पर नवगछिया थाना पुलिस मौके पर पहुंची. पुलिस ने युवती को सुरक्षित अपने संरक्षण में लिया और नवगछिया अनुमंडल अस्पताल में भर्ती कराया. नवजात के शव को कब्जे में लेकर आवश्यक कानूनी प्रक्रिया शुरू की गयी है. पुलिस के अनुसार, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.
घटना ने व्यवस्था पर खड़े किये कई गंभीर सवाल
यह घटना सिर्फ एक नवजात की मौत की कहानी नहीं है, बल्कि वर्षों से सड़कों पर भटक रही एक मानसिक रूप से अस्वस्थ महिला की सुरक्षा और पुनर्वास व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है. आखिर उसकी गर्भावस्था किन परिस्थितियों में हुई? क्या उसकी असहाय स्थिति का किसी ने फायदा उठाया? यदि ऐसा हुआ तो जिम्मेदार कौन है? और जब वह वर्षों से सड़कों पर भटक रही थी, तो समय रहते उसे स्थायी संरक्षण क्यों नहीं मिल सका? इन सवालों के जवाब अब पुलिस जांच के साथ तलाशे जाएंगे.
















