5
(2)

@ पीरपैंती में 100 एकड़ सरकारी जमीन चिह्नित, जब गन्ने की खेती ही सिमट गई तो मिल के लिए जमीन तलाशने की कवायद तेज।

प्रदीप विद्रोही

भागलपुर। जिस इलाके में कभी गन्ने की खेती को लेकर किसानों की उम्मीदें जुड़ी थीं, वहां गन्ने की खेती का रकबा लगातार सिमटने के बाद अब सरकार को चीनी मिल की याद आई है। पीरपैंती में चीनी मिल स्थापित करने की कवायद एक बार फिर तेज हो गई है। इसके लिए प्रखंड की परसबन्ना पंचायत के मंदरोही गांव में करीब 100 एकड़ सरकारी जमीन चिह्नित की गई है। यह जमीन बिहार सरकार की अनावाद जमीन बताई जा रही है।

गन्ना विकास विभाग ने कुछ दिन पहले भागलपुर जिला प्रशासन को पत्र भेजकर चीनी मिल के लिए उपयुक्त जमीन चिह्नित करने और उसका प्रस्ताव अविलंब उपलब्ध कराने को कहा था। विभाग के निर्देश के बाद प्रशासन ने पीरपैंती प्रखंड में सरकारी जमीन की तलाश शुरू की। इसी क्रम में परसबन्ना पंचायत के मंदरोही गांव में करीब 100 एकड़ जमीन उपलब्ध होने की जानकारी सामने आई।

अब जिला प्रशासन इस जमीन का प्रस्ताव गन्ना विकास विभाग को भेजने की प्रक्रिया में जुटा है। हालांकि, जमीन चिह्नित होने भर से चीनी मिल की स्थापना का रास्ता साफ नहीं हुआ है। विभागीय स्वीकृति, जमीन की उपयुक्तता की जांच और अन्य प्रशासनिक एवं तकनीकी प्रक्रियाओं के बाद ही परियोजना आगे बढ़ सकेगी।

खेती सिमटी, अब मिल के लिए जमीन तलाश रही सरकार:

पीरपैंती में चीनी मिल की मांग कोई नई बात नहीं है। क्षेत्र में गन्ने की खेती और किसानों की उपज को देखते हुए लंबे समय से यहां चीनी मिल की जरूरत महसूस की जाती रही है। लेकिन विडंबना यह है कि जब चीनी मिल की मांग और उम्मीद के अनुरूप गन्ने की खेती का विस्तार नहीं हो सका और खेती का रकबा सिमट गया, तब मिल के लिए जमीन चिह्नित करने की प्रक्रिया तेज हुई है।

प्रश्न यह भी है कि यदि क्षेत्र में चीनी मिल स्थापित करनी है तो उसके लिए पर्याप्त गन्ना उत्पादन सुनिश्चित करने की ठोस तैयारी कितनी हुई है। मिल के लिए जमीन उपलब्ध कराना पहला कदम हो सकता है, लेकिन उसके सफल संचालन के लिए आसपास के इलाके में पर्याप्त गन्ना उत्पादन और किसानों को नियमित बाजार की गारंटी भी जरूरी होगी।

डीएम ने कहा- प्रस्ताव भेजने की प्रक्रिया जारी:

जिलाधिकारी अलंकृता पांडे ने बताया कि पीरपैंती की परसबन्ना पंचायत के मंदरोही गांव में सरकारी जमीन देखी गई है। इसका प्रस्ताव संबंधित विभाग को भेजने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है।

जिला प्रशासन के स्तर पर जमीन चिह्नित किए जाने के बाद अब लोगों की निगाह विभागीय निर्णय पर टिक गई है। प्रस्ताव स्वीकृत होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि पीरपैंती में चीनी मिल की परियोजना किस रूप में और कितनी क्षमता के साथ आगे बढ़ेगी।

जिले में 128 हेक्टेयर में गन्ने की खेती, सबसे आगे पीरपैंती:

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार भागलपुर जिले में गन्ने की खेती का सबसे बड़ा क्षेत्र पीरपैंती में है। यहां करीब 74 हेक्टेयर में गन्ने की खेती होती है। इसके अलावा सन्हौला में 34 हेक्टेयर, नाथनगर में 10 हेक्टेयर और शाहकुंड में 10 हेक्टेयर में गन्ने की खेती होती है।

इस तरह दिए गए आंकड़ों के अनुसार जिले में कुल करीब 128 हेक्टेयर में गन्ने की खेती होती है। ऐसे में पीरपैंती में चीनी मिल की स्थापना होने पर स्थानीय गन्ना किसानों को अपनी उपज के लिए नजदीकी बाजार मिलने की उम्मीद की जा सकती है।

किसानों को मिल सकता है सीधा फायदा:

चीनी मिल शुरू होने की स्थिति में पीरपैंती और आसपास के क्षेत्रों के किसानों को गन्ने की बिक्री के लिए दूर के बाजारों पर निर्भरता कम हो सकती है। गन्ने की ढुलाई में लगने वाला समय और खर्च घट सकता है। मिल की नियमित मांग से किसान गन्ने की खेती का रकबा बढ़ाने के लिए भी प्रेरित हो सकते हैं।

इसके अलावा मिल के आसपास परिवहन, लोडिंग-अनलोडिंग, मरम्मत, पैकेजिंग और अन्य सहायक गतिविधियों का विस्तार होने की संभावना है। इससे स्थानीय स्तर पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी पैदा हो सकते हैं।

जमीन मिल गई, अब गन्ना कहां से आएगा?

चीनी मिल के लिए 100 एकड़ जमीन चिह्नित करना निश्चित रूप से महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन असली चुनौती इसके बाद शुरू होगी। मिल को लगातार चलाने के लिए पर्याप्त मात्रा में गन्ने की जरूरत होगी। इसके लिए किसानों को बेहतर बीज, सिंचाई, तकनीकी मार्गदर्शन, समय पर भुगतान और उपज के लिए सुनिश्चित बाजार जैसी सुविधाएं देनी होंगी।

सवाल यह भी है कि जिस क्षेत्र में गन्ने की खेती का रकबा अपेक्षाकृत सीमित है, वहां प्रस्तावित मिल की जरूरत के अनुरूप गन्ना उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकार की क्या कार्ययोजना है। केवल जमीन चिह्नित कर देने से चीनी मिल का सपना पूरा नहीं होगा; खेत से मिल तक गन्ने की पूरी व्यवस्था खड़ी करनी होगी।

100 एकड़ जमीन चिह्नित, अब फैसले का इंतजार:

फिलहाल पीरपैंती के मंदरोही गांव में 100 एकड़ सरकारी जमीन चिह्नित किए जाने से चीनी मिल की वर्षों पुरानी उम्मीद को नई हवा मिली है। अब प्रस्ताव विभाग को भेजे जाने के बाद सरकार के निर्णय पर सबकी नजर है। किसानों की उम्मीद है कि यह कवायद केवल जमीन चिह्नित करने तक सीमित न रहकर वास्तविक चीनी मिल की स्थापना तक पहुंचे।

क्योंकि सवाल सिर्फ मिल बनाने का नहीं है—सवाल यह भी है कि जब मिल तैयार होगी, तब उसे चलाने के लिए खेतों में पर्याप्त गन्ना होगा या नहीं।

Aapko Yah News Kaise Laga.

Click on a star to rate it!

Average rating 5 / 5. Vote count: 2

No votes so far! Be the first to rate this post.

Share: