


नवगछिया व्यवहार न्यायालय के विशेष पॉक्सो कोर्ट ने एक भयावह और शर्मनाक मामले में आरोपी चंदन कुमार को सजा का एलान किया है। कोर्ट ने आरोपी को धारा 376 भादवि, पॉक्सो एक्ट की धारा 6, और धारा एबी 6 के तहत दोषी मानते हुए 20-20 वर्ष की कठोर सजा सुनाई है। इसके अतिरिक्त, अदालत ने आरोपी पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है, और पीड़िता को एक लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश भी जारी किया है।
घटना का संक्षिप्त विवरण
यह घटना इस्माइलपुर थाना क्षेत्र के जयमंगल टोला की है। बताया गया है कि घटना दिनांक 16 सितंबर 2023 की है, जब छह वर्षीय बच्ची अपने घर के आस-पास खेल रही थी। इसी दौरान आरोपी चंदन कुमार ने बच्ची का बहला-फुसलाकर उसे मनीजरा के खेत में ले जाकर दुष्कर्म किया। बच्ची के चीखने-चिल्लाने की आवाज सुनकर आसपास के लोग पहुंचे तो आरोपी बच्ची का कपड़ा लेकर फरार हो चुका था। बच्ची को खून से लथपथ अवस्था में परिजन घर ले आए।

पीड़िता का प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई
बच्ची के परिजनों ने तुरंत ही नवगछिया महिला थाना में इसकी रिपोर्ट दर्ज कराई। बच्ची का इलाज कराते समय उसकी हालत गंभीर थी। परिवार और स्थानीय लोगों ने आरोपी के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने आरोपी की तलाश शुरू की और अंततः उसे गिरफ्तार कर लिया।
मामले की सुनवाई और फैसला
मामले की सुनवाई नवगछिया व्यवहार न्यायालय के स्पेशल पॉक्सो कोर्ट में हुई। अदालत में सात गवाहों ने अपने बयान दर्ज कराए, जिन्होंने सभी अभियोजन पक्ष का समर्थन किया। गवाहों ने घटना का पूरा विवरण दिया और आरोपी के खिलाफ साक्ष्य प्रस्तुत किए।
सुनवाई के दौरान, अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता शंभुनाथ सिंह ने आरोपी को कठोर सजा देने की अपील की। कोर्ट ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद फैसला सुनाया।
न्यायालय ने आरोपित चंदन कुमार को धारा 376 भादवि में 20 वर्षों, पॉक्सो एक्ट की धारा 6 में 20 वर्षों, और धारा एबी 6 भादवि में भी 20 वर्षों की सजा सुनाई, जो सभी साथ-साथ चलेगी। इसके साथ ही, आरोपी पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि पीड़िता को एक लाख रुपये मुआवजा दिया जाए। सामाजिक प्रतिक्रिया
इस कठोर फैसले ने समाज में अपराधियों के प्रति सख्त संदेश दिया है कि बच्चियों के साथ किसी भी तरह का अपराध बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आरोपी को दी गई यह सजा समाज में न केवल अपराध पर नकेल कसने का संकेत है, बल्कि बच्चियों की सुरक्षा को सर्वोपरि माना जाने का भी प्रमाण है।
अपर लोक अभियोजक शंभुनाथ सिंह ने बहस के दौरान आरोपी के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की थी, जिस पर न्यायालय ने अपना फैसला सुनाते हुए पीड़ित के प्रति न्याय सुनिश्चित किया।
















