


प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। जिले में ब्राउन शुगर के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई लगातार जारी है। कार्रवाई की सूची देखें तो पुलिस की पकड़ में एक के बाद एक नाम आ रहे हैं और ब्राउन शुगर भी बरामद हो रही है। लेकिन बरामदगी का आंकड़ा जैसे ही ग्राम से किलो की ओर बढ़ाने की कोशिश की जाती है, तस्वीर कुछ अलग ही नजर आती है। यानी कार्रवाई तो खूब हो रही है, मगर अब तक कहानी मुख्यतः छोटे स्तर पर कथित रूप से नशीला पदार्थ बेचने या रखने वालों की गिरफ्तारी तक ही सीमित दिख रही है।
20 अगस्त को सबौर थाना क्षेत्र में पुलिस ने 14.32 ग्राम ब्राउन शुगर के साथ ज्योतिष, मो. लालू और धर्मेंद्र को पकड़ा। इससे दो दिन पहले, 17 अगस्त को मधुसूदनपुर थाना क्षेत्र में 8.44 ग्राम ब्राउन शुगर के साथ बादल, मिथिलेश, गौतम, टिंक और संजय गिरफ्तार किए गए।

15 अगस्त को अंतीचक थाना क्षेत्र में पुलिस ने 26 ग्राम ब्राउन शुगर के साथ नवनीत, अखिलेश, मिथिलेश और ब्रजेश को गिरफ्तार किया। वहीं, छह अगस्त को इशाकचक थाना क्षेत्र में 28 ग्राम ब्राउन शुगर के साथ तातारपुर के आयुष को पुलिस ने पकड़ा। इससे पहले 19 जुलाई को बबरगंज थाना क्षेत्र में 58.61 ग्राम ब्राउन शुगर के साथ एक नाबालिग को संरक्षण में लिया गया था। 19 जून को सबौर थाना क्षेत्र में 10 ग्राम ब्राउन शुगर के साथ मिर्जापुर के राजेश कुमार की गिरफ्तारी हुई।
नौ जून को नाथनगर थाना क्षेत्र में 14 ग्राम ब्राउन शुगर के साथ बाबूटोला के मनोज यादव को पकड़ा गया। सात जून को गोराडीह थाना क्षेत्र में 6.90 ग्राम ब्राउन शुगर के साथ नीतीश और चंदन कुमार पुलिस के हत्थे चढ़े। छह जून को बुद्धचक थाना क्षेत्र में 20 ग्राम ब्राउन शुगर के साथ छोटू कुमार गिरफ्तार हुआ।
इसके अलावा मधुसूदनपुर थाना क्षेत्र में नूरपुर के मोहन सिंह को 10.80 ग्राम ब्राउन शुगर के साथ गिरफ्तार किया गया था। तीन जून को सबौर थाना क्षेत्र में 10 ग्राम ब्राउन शुगर के साथ हनी झा और सुमित कुमार को पुलिस ने पकड़ा था।
कुल बरामदगी 217.07 ग्राम, गिरफ्तारियों का आंकड़ा भी लंबा:
तीन जून से 20 अगस्त तक सामने आए इन मामलों में कुल 217.07 ग्राम ब्राउन शुगर की बरामदगी बताई गई है। यानी दो महीने से ज्यादा की कार्रवाई में बरामदगी का कुल आंकड़ा अभी एक किलो का चौथाई हिस्सा भी नहीं छू पाया है।
यहीं से पुलिस की कार्रवाई पर सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है। नशे का कारोबार अगर इतना सक्रिय है तो माल की सप्लाई आखिर आती कहां से है? पुलिस की कार्रवाई में बार-बार छोटी मात्रा के साथ कथित पैडलर और नशे के छोटे कारोबारी पकड़े जा रहे हैं, लेकिन इनके पीछे मौजूद सप्लाई चेन और बड़े कारोबारी अब तक तस्वीर से बाहर क्यों हैं?
‘ग्रामों’ में बड़ी कार्रवाई, किलो वाले खिलाड़ी कहां:
ब्राउन शुगर के खिलाफ कार्रवाई की खबरों में गिरफ्तारी के साथ बरामदगी का आंकड़ा प्रमुखता से सामने आता है। मगर जब आंकड़ों को जोड़कर देखा जाए तो एक दिलचस्प तस्वीर बनती है—कहीं 6.90 ग्राम, कहीं 8.44 ग्राम, तो कहीं 10, 14, 20, 26 और 28 ग्राम। सबसे ज्यादा बरामदगी 58.61 ग्राम की बताई गई है।
पुलिस की कार्रवाई में ग्राम-ग्राम की बरामदगी का हिसाब तो मिल रहा है, लेकिन किलो वाले कारोबारी का पता अब तक नहीं मिल रहा। कार्रवाई का पहिया घूम रहा है, गिरफ्तारियां हो रही हैं, केस दर्ज हो रहे हैं और नशे की छोटी खेपें जब्त की जा रही हैं। मगर सवाल वही है – इन छोटी खेपों के पीछे बड़ी खेप कौन भेज रहा है। पैडलर पकड़े जा रहे, सप्लायर तक कब पहुंचेगी कार्रवाई।
नशे के कारोबार का नेटवर्क सामान्यतः केवल उस व्यक्ति तक सीमित नहीं होता, जिसके पास से पुलिस को पदार्थ मिलता है। उसके पीछे सप्लायर, डीलर और पूरे नेटवर्क की भूमिका की जांच जरूरी होती है। ऐसे में लगातार छोटे स्तर के आरोपितों की गिरफ्तारी के बावजूद अगर बड़े नाम सामने नहीं आते हैं, तो कार्रवाई की प्रभावशीलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
बहरहाल, पुलिस की ओर से की गई गिरफ्तारियां और बरामदगी अपनी जगह कार्रवाई का संकेत देती हैं। लेकिन असली सफलता तब मानी जाएगी, जब पुलिस ‘ग्राम’ की बरामदगी से आगे बढ़कर उस नेटवर्क की जड़ तक पहुंचे, जहां से यह नशीला कारोबार संचालित होता है।
फिलहाल तस्वीर यही है – पुलिस के हाथ में छोटी-छोटी पुड़िया जरूर आ रही हैं, मगर इन पुड़ियों तक माल पहुंचाने वाले बड़े हाथ अभी भी पकड़ से दूर नजर आ रहे हैं।
















