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@ भागलपुर में 0.24 मीटर, हाथीदह में 0.15 मीटर, दीघाघाट में 0.14 मीटर और पटना के गांधीघाट में 0.02 मीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इन केंद्रों में गांधीघाट पर जलस्तर खतरे के स्तर से 0.97 मीटर ऊपर रहा।

प्रदीप विद्रोही

भागलपुर। बिहार में बाढ़ का मिजाज अभी पूरी तरह शांत नहीं हुआ है। सोमवार दोपहर 2 बजे केंद्रीय बाढ़ नियंत्रण प्रकोष्ठ की रिपोर्ट ने राज्य की प्रमुख नदियों के जलस्तर की एक ऐसी तस्वीर सामने रखी है, जिसमें कहीं पानी बढ़ रहा है तो कहीं नदियों का जलस्तर नीचे उतरने लगा है। 31 निगरानी स्टेशनों से मिले आंकड़े बताते हैं कि फिलहाल हालात मिश्रित हैं, लेकिन कई इलाकों में प्रशासन को लगातार सतर्क रहने की जरूरत बनी हुई है।
जहां पानी बढ़ा, वहां खतरे की घंटी:
रिपोर्ट के अनुसार, गंडक नदी के डुमरियाघाट में जलस्तर 24 घंटे में 0.15 मीटर बढ़ा और यह खतरे के स्तर से 0.64 मीटर ऊपर दर्ज किया गया। खगड़िया में बूढ़ी गंडक भी खतरे के निशान से 0.32 मीटर ऊपर बह रही है।
गंगा में भी कई निगरानी केंद्रों पर जलस्तर बढ़ने का सिलसिला जारी है। भागलपुर में 0.24 मीटर, हाथीदह में 0.15 मीटर, दीघाघाट में 0.14 मीटर और पटना के गांधीघाट में 0.02 मीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इन केंद्रों में गांधीघाट पर जलस्तर खतरे के स्तर से 0.97 मीटर ऊपर रहा।
सबसे ज्यादा राहत: कई नदियां उतरने लगीं:
दूसरी ओर, कई नदियों में पानी घटने से राहत के संकेत भी मिले हैं। बूढ़ी गंडक के मुजफ्फरपुर स्थित सिकंदरपुर में जलस्तर 0.29 मीटर नीचे आया, जबकि समस्तीपुर में 0.14 मीटर की कमी दर्ज हुई।
अडवारा नदी के कमतौल स्टेशन पर जलस्तर 0.27 मीटर और मुनफो नदी के श्रीपालपुर में 0.32 मीटर घटा। महानंदा नदी के तैयबपुर में भी 0.07 मीटर की कमी दर्ज की गई।
गंगा पर सबसे ज्यादा नजर:
गंगा से जुड़े आंकड़े इस समय खास तौर पर महत्वपूर्ण हैं। भागलपुर में नदी का जलस्तर खतरे के निशान से सिर्फ 0.45 मीटर नीचे है, जबकि दीघाघाट में यह 0.30 मीटर ऊपर और हाथीदह में 0.75 मीटर ऊपर दर्ज किया गया।
भागलपुर के गोपालपुर स्थित केंद्र पर जलस्तर 0.70 मीटर घटा, हालांकि वहां भी पानी खतरे के स्तर से 0.50 मीटर ऊपर बना हुआ है।
31 स्टेशनों का डेटा, तस्वीर साफ – खतरा टला नहीं:


रिपोर्ट का सबसे बड़ा संकेत यही है कि बिहार में बाढ़ का संकट एक जैसा नहीं है। कुछ इलाकों में नदियां नीचे जा रही हैं तो कुछ जगहों पर पानी अब भी बढ़ रहा है। कई स्थानों पर जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर बना हुआ है।
ऐसे में तटबंधों, दियारा क्षेत्रों और निचले इलाकों में निगरानी को ढीला करना फिलहाल जोखिम भरा हो सकता है। खासकर गंगा, गंडक और बूढ़ी गंडक के संवेदनशील इलाकों में अगले कुछ घंटों का जलस्तर प्रशासन के लिए बेहद अहम रहने वाला है।
24 अगस्त की दोपहर 2 बजे तक की तस्वीर यही कहती है – बिहार में पानी कहीं उतर रहा है, कहीं चढ़ रहा है और बाढ़ का खतरा अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

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