


@ 24 घंटे मुस्तैद रहीं मेडिकल टीमें, 15 अस्थायी स्वास्थ्य केंद्रों से करीब 2 लाख श्रद्धालुओं तक पहुंची चिकित्सा सेवा।
प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। कंधे पर कांवर, जुबां पर बोल बम और आंखों में बाबा बैद्यनाथ के दर्शन की आस। सुल्तानगंज से देवघर की कठिन यात्रा पर निकलते लाखों श्रद्धालुओं के लिए यह सिर्फ आस्था की राह नहीं थी, बल्कि तपस्या जैसी यात्रा थी। किसी के कदम थक रहे थे, कोई गर्मी से बेहाल था, किसी को चक्कर आ रहा था तो कहीं अचानक चिकित्सा सहायता की जरूरत पड़ रही थी।
श्रावणी मेला-2026 में भागलपुर स्वास्थ्य विभाग ने करीब 2 लाख श्रद्धालुओं को चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराईं। दिन हो या रात, आस्था का कारवां चलता रहा और उसके साथ स्वास्थ्य विभाग का ‘स्वास्थ्य कवच’ भी मुस्तैद रहा।
मेला शुरू होने से पहले ही स्वास्थ्य विभाग ने सुल्तानगंज मेला क्षेत्र और कांवरिया मार्ग का स्वास्थ्य आकलन किया। संभावित जोखिमों को चिन्हित कर डॉक्टर, नर्स, पैरामेडिकल कर्मी, दवाएं, चिकित्सा उपकरण और एंबुलेंस की व्यवस्था की गई। श्रद्धालुओं को छोटी-बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के लिए दूर अस्पताल तक जाने की मजबूरी न हो, इसके लिए प्रमुख मार्गों और संवेदनशील स्थानों पर 15 अस्थायी चिकित्सा शिविर एवं स्वास्थ्य केंद्र स्थापित किए गए।
श्रावणी मेले में श्रद्धालुओं की आवाजाही किसी घड़ी की मोहताज नहीं होती। इसी को देखते हुए स्वास्थ्य सेवाओं को 24×7 सक्रिय रखा गया। रात के सन्नाटे में भी मेडिकल कैंपों की गतिविधियां जारी रहीं। थके हुए कांवरियों को प्राथमिक उपचार मिला, दवाएं दी गईं और गंभीर स्थिति में तत्काल रेफरल की व्यवस्था की गई।

लंबी दूरी की पैदल यात्रा, उमस और गर्मी के बीच डिहाइड्रेशन, कमजोरी और थकान बड़ी चुनौती बन सकती थी। स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने ऐसे मामलों में तत्काल चिकित्सा सहायता देने के साथ श्रद्धालुओं को पर्याप्त पानी पीने, बीच-बीच में आराम करने और स्वास्थ्य बिगड़ने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेने के लिए जागरूक किया।
मेडिकल व्यवस्था में महिला श्रद्धालुओं, बच्चों और बुजुर्गों की जरूरतों को भी विशेष प्राथमिकता दी गई। महिला स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता के साथ आवश्यक चिकित्सा सहायता प्रदान की गई। गंभीर या विशेष उपचार की आवश्यकता वाले मरीजों को समय रहते उच्च चिकित्सा संस्थानों के लिए रेफर किया गया।
मेले के दौरान स्वास्थ्य विभाग की भूमिका सिर्फ सामान्य उपचार तक सीमित नहीं रही। सर्पदंश और सड़क दुर्घटनाओं जैसी आपात स्थितियों में भी मेडिकल टीमों ने तत्परता दिखाई।
करीब 2 लाख श्रद्धालुओं तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचना केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि डॉक्टरों, नर्सों, पैरामेडिकल कर्मियों, एंबुलेंस कर्मियों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की लगातार मेहनत की कहानी है।
किसी ने उपचार किया।किसी ने दवा दी।किसी ने एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाया और किसी ने अपने व्यवहार से भरोसा दिया। यही वह अदृश्य सेवा थी, जिसने कांवरियों की इस विशाल यात्रा को स्वास्थ्य के लिहाज से सुरक्षित बनाने में बड़ी भूमिका निभाई।
श्रावणी मेला जैसे विशाल आयोजन में स्वास्थ्य व्यवस्था की सफलता अकेले स्वास्थ्य विभाग की उपलब्धि नहीं होती। जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन, नगर निकाय और अन्य विभागों के साथ समन्वय ने पूरी व्यवस्था को मजबूती दी।

















