


@ संवाद के अंत में हाल ही में नेपाल त्रासदी में अपनी जान गंवाने वाले लोगों की याद में एक मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। ‘फरक्का बराज को हटाया जाए, और जब तक यह नहीं हटता तब तक बांग्लादेश के साथ गंगा जल बंटवारा संधि को जारी रखा जाए।’ इसी मजबूत विजन स्टेटमेंट के साथ गंगा मुक्ति आंदोलन द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय जन-संवाद का रविवार को समापन हो गया। इस बैठक में बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल से जुटे नदी प्रेमियों, पर्यावरणविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एक स्वर में गंगा और उसकी सहायक नदियों की अविरलता की वकालत की।

पानी पर सबका हक, जल राष्ट्रवाद पर रोक लगे: जया मित्र
प्रसिद्ध साहित्यकार व नदीकर्मी जया मित्र ने ‘पानी के राष्ट्रवाद’ पर चिंता जताते हुए कहा कि बराज और जल संधि दो अलग-अलग विषय हैं। जब देश नहीं थे, तब भी नदियां बहती थीं। आज पानी को एक राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। बांग्लादेश का गंगा के जल पर उतना ही अधिकार है जितना भारत का, और बंगाल-झारखंड का भी उतना ही हक है जितना यूपी-बिहार का।
गाद और कटाव से तबाही, दियारा-मछुआरे बने शिकार
जन-संवाद की अध्यक्षता कर रहे टीएमबीयू के पूर्व डीएसडब्ल्यू डॉ. योगेंद्र और संचालन कर रहे उदय के सामने वक्ताओं ने गंगा के दर्द को साझा किया। मालदा से आए गौतम पाल और खिदिर बॉक्स ने बताया कि बराज के कारण गाद जमा होने से गंगा उथली हो गई है, जिससे भयंकर बाढ़ और मालदा में बड़े पैमाने पर कटाव हो रहा है। मछुआरे, किसान, दियारा और चौर क्षेत्र के लोग इस बराज के सीधे शिकार (विक्टिम) बने हैं।
संवाद में नेपाल को भी शामिल करने की मांग:
पर्यावरणविद घनश्याम ने सुझाव दिया कि गंगा संकट के हल के लिए संवाद की प्रक्रिया में नेपाल को भी भागीदार बनाना अनिवार्य है। फरक्का और भारत-बांग्लादेश जल समितियों में सभी प्रभावित हितधारकों (स्टेकहोल्डर्स) को जगह मिलनी चाहिए। जन-संवाद में महेंद्र यादव और तापस दास द्वारा प्रस्तुत ‘विजन ड्राफ्ट’ को सर्वसम्मति से पारित किया गया।
नदी को न ‘वाटर बम’ बनने देंगे, न ध्रुवीकरण का जरिया:

धन्यवाद ज्ञापन करते हुए रामशरण ने दो टूक कहा कि नदी के पानी को न तो सामाजिक ध्रुवीकरण का हथियार बनने दिया जाएगा और न ही इसे ‘वाटर बम’ की तरह इस्तेमाल करने दिया जाएगा। कार्यक्रम को डॉ. रुचि श्री, मनोज मीता, रोहित कुमार और उज्ज्वल घोष जैसे कार्यकर्ताओं ने अपने विचारों से ऊर्जावान बनाया।
संवाद के अंत में हाल ही में नेपाल त्रासदी में अपनी जान गंवाने वाले लोगों की याद में एक मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
















