


@ गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष व्यवस्था, एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाकर कराया जा रहा सुरक्षित प्रसव, राहत शिविरों में 37 गर्भवतियां चिन्हित।
प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। भागलपुर में एक ओर गंगा और कोसी का उफान थम तो गया है मगर गंगा – कोसी अपने घर लौटने को अभी तैयार नहीं है। अब भी पीड़ित परिवार अपने गांव-घर नहीं लौट पा रहे हैं। दूसरी ओर इसी सैलाब के बीच जिंदगी अपनी नई कहानी लिख रही है। बाढ़ की मुश्किल परिस्थितियों के बीच राहत शिविरों में रह रहीं गर्भवती महिलाओं के लिए जिला प्रशासन ने विशेष व्यवस्था की है। अब तक 37 गर्भवती महिलाओं को चिन्हित किया गया है। इनमें से चार महिलाओं को एंबुलेंस के जरिए सरकारी अस्पताल पहुंचाकर सुरक्षित प्रसव कराया गया है। इन चार प्रसवों में दो बच्चियों और दो बच्चों ने जन्म लिया।
बाढ़ के बीच इन नवजातों की किलकारी ने मानो राहत शिविरों में उम्मीद की एक नई आवाज भर दी है। जिला प्रशासन की ओर से जन्म लेने वाले बच्चों के लिए बेबी किट, माताओं के लिए 15 हजार रुपये तथा नवजात बच्चों के लिए 10 हजार रुपये की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
सैलाब के बीच 9 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित

गंगा एवं कोसी नदी के जलस्तर में अप्रत्याशित वृद्धि के कारण भागलपुर जिले के 12 अंचलों की 114 पंचायत, 456 गांव और 899 वार्ड प्रभावित हुए हैं। जिला प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार बाढ़ से 2,10,219 परिवारों के 9,15,781 लोग प्रभावित हुए हैं। प्रशासन की ओर से प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य लगातार चलाया जा रहा है। आवागमन के लिए 123 नाव और एक बोट एंबुलेंस संचालित की जा रही है। संकट की घड़ी में यही नावें लोगों के लिए सड़क का विकल्प बनी हुई हैं।
राहत शिविरों में घर जैसा माहौल देने की कोशिश की गई है।बच्चों के लिए दूध-बिस्किट, अस्थायी विद्यालय और आंगनबाड़ी केंद्र की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा स्वास्थ्य शिविर, पशु चिकित्सा शिविर, एंबुलेंस, योग शिविर, मंजूषा कला प्रशिक्षण शिविर और एलसीडी टीवी जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं।
बाढ़ प्रभावित बच्चों के बीच अब तक 856 किलो दूध और 3,733 किलो दुग्ध पाउडर वितरित किया जा चुका है। वहीं पशुओं के लिए 944.43 क्विंटल पशुचारा और 29,850 बाढ़ प्रभावित परिवारों को पॉलीथिन शीट उपलब्ध कराई गई है।
सैलाब के बीच प्रशासन की परीक्षा, मां और नवजातों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
बाढ़ जैसी आपदा में गर्भवती महिलाओं और नवजात बच्चों की सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती होती है। ऐसे में चार गर्भवती महिलाओं को समय पर एंबुलेंस के जरिए अस्पताल पहुंचाकर सुरक्षित प्रसव कराया जाना राहत कार्यों के मानवीय पहलू को सामने लाता है।
जिला के प्रभारी मंत्री नीतीश मिश्रा, सांसद अजय कुमार मंडल,मंत्री बुलो मंडल, ई शैलेन्द्र और विधायक रोहित पांडे, ई शुभानंद मुकेश, मुरारी पासवान, मिथुन कुमार, ललित नारायण मंडल भी राहत शिविरों में पहुंचकर बाढ़ पीड़ितों का हालचाल ले रहे हैं और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दे रहे हैं।
सैलाब ने भागलपुर के हजारों परिवारों को घरों से दूर जरूर कर दिया है, लेकिन राहत शिविरों में जन्मी चार जिंदगियों ने यह संदेश जरूर दिया है कि आपदा कितनी भी बड़ी हो, जिंदगी अपनी राह तलाश ही लेती है। बाढ़ के पानी के बीच गूंजी इन चार नन्हीं किलकारियों ने मुश्किल वक्त में उम्मीद का उजाला जगा दिया है।
















