
संवाद श्रृंखला-6 में शिक्षकों और छात्र-छात्राओं ने मिसाइल मैन के व्यक्तित्व, वैज्ञानिक उपलब्धियों और शिक्षा के प्रति समर्पण पर की चर्चा, उनके आदर्शों को जीवन में अपनाने का आह्वान
खरीक। राजकीय डिग्री महाविद्यालय, खरीक में संवाद श्रृंखला-6 के अंतर्गत भारत के पूर्व राष्ट्रपति एवं महान वैज्ञानिक डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की जयंती पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के शिक्षकों एवं छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। संगोष्ठी के दौरान वक्ताओं ने डॉ. हैकलाम के व्यक्तित्व, कृतित्व, वैज्ञानिक उपलब्धियों और शिक्षा के प्रति उनके समर्पण पर विस्तार से प्रकाश डाला। साथ ही विद्यार्थियों से उनके विचारों को अपने जीवन में अपनाने और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने की अपील की गई।

वक्ताओं ने कहा कि डॉ. कलाम का जीवन संघर्ष, मेहनत, अनुशासन और दृढ़ इच्छाशक्ति का प्रेरणादायक उदाहरण है। साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर विज्ञान के क्षेत्र में देश को नई दिशा देने और राष्ट्रपति पद तक पहुंचने का उनका सफर विद्यार्थियों को बड़े सपने देखने तथा उन्हें पूरा करने के लिए निरंतर प्रयास करने की प्रेरणा देता है।
बड़े सपने देखने और जिम्मेदारियों के प्रति सचेत रहने का संदेश
संगोष्ठी का संचालन करते हुए इतिहास के प्राध्यापक डॉ. राजीव ने कहा कि डॉ. कलाम का मानना था कि व्यक्ति को खुली आंखों से सपने देखने चाहिए और अपनी जिम्मेदारियों के प्रति हमेशा सचेत रहना चाहिए। सपने तभी सार्थक होते हैं, जब उन्हें पूरा करने के लिए ईमानदारी से मेहनत की जाए। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने और जीवन में निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
अंग्रेजी की प्राध्यापक डॉ. सोनम ने डॉ. कलाम की चर्चित पुस्तक अग्नि की उड़ान का उल्लेख करते हुए कहा कि यह पुस्तक सिखाती है कि विषम परिस्थितियों में भी दृढ़ इच्छाशक्ति और निरंतर प्रयास के बल पर सफलता प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने कहा कि डॉ. कलाम का जीवन इस बात का प्रमाण है कि कठिनाइयां किसी व्यक्ति की प्रगति को रोक नहीं सकतीं, यदि उसके भीतर कुछ कर गुजरने का संकल्प हो। उनके विचार देश को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की प्रेरणा देते हैं।

डॉ. कलाम का जीवन हर पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत
संवाद श्रृंखला के संयोजक एवं हिंदी के प्राध्यापक डॉ. चैतन्य ने कहा कि मिसाइल मैन डॉ. कलाम का जीवन प्रेरणा का अनमोल स्रोत है। उनके जीवन का प्रत्येक अध्याय लोगों को कुछ नया सीखने और अपने व्यक्तित्व को बेहतर बनाने की प्रेरणा देता है।
उन्होंने कहा कि समाज के साधारण तबके से निकलकर विज्ञान के क्षेत्र में देश को नई दिशा देना और राष्ट्रपति पद तक पहुंचने के बावजूद सहज एवं सरल व्यवहार बनाए रखना डॉ. कलाम की विशिष्ट पहचान थी। उनकी सादगी, विनम्रता और ज्ञान के प्रति समर्पण उन्हें असाधारण व्यक्तित्व बनाते हैं। विद्यार्थियों को उनके जीवन से सीख लेकर अपने लक्ष्य की दिशा में निरंतर प्रयास करना चाहिए।
अंग्रेजी की प्राध्यापक डॉ. अमृता ने कहा कि डॉ. कलाम कर्म को ही पूजा मानते थे। वे शिक्षा और शिक्षण कार्य को विशेष महत्व देते थे। उन्होंने बताया कि डॉ. कलाम ने एक अवसर पर कहा था कि वे शिक्षक के रूप में याद किया जाना पसंद करेंगे। यह विचार शिक्षा और शिक्षक की भूमिका के प्रति उनके गहरे सम्मान को दर्शाता है।
बड़ा लक्ष्य निर्धारित कर निरंतर मेहनत करने की जरूरत
अर्थशास्त्र के प्राध्यापक प्रिंस कुमार ने डॉ. कलाम के प्रेरक विचारों को साझा करते हुए कहा कि उनका संदेश था कि छोटा लक्ष्य रखना अपराध है। इसलिए विद्यार्थियों को हमेशा बड़ा लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए और उसे प्राप्त करने के लिए पूरी निष्ठा से मेहनत करनी चाहिए।
उन्होंने डॉ. कलाम के प्रेरक कथन का उल्लेख करते हुए कहा कि सूरज की तरह चमकने के लिए पहले उसकी तरह तपना पड़ता है। इसका अर्थ है कि जीवन में सफलता हासिल करने के लिए कठिन परिश्रम, धैर्य और संघर्ष से गुजरना जरूरी है। विद्यार्थियों को असफलताओं से निराश होने के बजाय उनसे सीख लेकर आगे बढ़ना चाहिए।
सादा जीवन और उच्च विचार के आदर्श थे डॉ. कलाम
धन्यवाद ज्ञापन करते हुए हिंदी की प्राध्यापक डॉ. रुचि ने कहा कि डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम सादा जीवन और उच्च विचार के आदर्श उदाहरण थे। उन्होंने शिक्षा और शिक्षकों को हमेशा विशेष महत्व दिया। उनके विचार आज भी विद्यार्थियों को बेहतर भविष्य बनाने, ज्ञान अर्जित करने और देश की प्रगति में योगदान देने के लिए प्रेरित करते हैं।
उन्होंने कहा कि डॉ. कलाम के आदर्शों को केवल याद करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके विचारों को अपने व्यवहार और जीवन में उतारना भी जरूरी है। उनकी जयंती पर आयोजित इस तरह की संगोष्ठियां विद्यार्थियों को उनके जीवन, संघर्ष और उपलब्धियों से परिचित कराने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।
कार्यक्रम में छात्र अभिनाश कुमार, चंदन कुमार, नेहा कुमारी, कोमल कुमारी सहित महाविद्यालय के कई छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। संगोष्ठी के माध्यम से विद्यार्थियों को शिक्षा, वैज्ञानिक सोच, अनुशासन, परिश्रम और राष्ट्रसेवा के महत्व का संदेश दिया गया।















