

425 साल पुराना है मंदिर का इतिहास, वैष्णवी स्वरूप में होती है मां दुर्गा की पूजा
नवगछिया। नवगछिया अनुमंडल क्षेत्र के तेतरी गांव में स्थित दुर्गा मंदिर का इतिहास करीब 425 साल पुराना बताया जाता है। यह मंदिर क्षेत्र के लोगों की आस्था और विश्वास से जुड़ा हुआ है। यहां मां दुर्गा की पूजा वैष्णवी स्वरूप में की जाती है। नवरात्र के दिनों में मंदिर में श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ जाती है और आसपास के गांवों से भी लोग मां के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं।

मंदिर की स्थापना को लेकर स्थानीय स्तर पर एक पुरानी लोकमान्यता प्रचलित है। इसके अनुसार, काजीकोरिया से गंगा की धारा में बहकर मां का मेढ़ कलबलिया धार पहुंचा था। उस समय इस मेढ़ को वापस ले जाने के लिए काजीकोरिया के लोग वहां पहुंचे थे। बुजुर्ग ग्रामीणों के मुताबिक, जब लोगों ने मेढ़ को उठाकर वापस ले जाने की कोशिश की तो वह अपनी जगह से नहीं उठा।
इसके बाद तेतरी गांव के ग्रामीणों ने भी मेढ़ को उठाने का प्रयास किया। बताया जाता है कि ग्रामीणों के प्रयास से मेढ़ आसानी से उठ गया। इसके बाद उसे तेतरी गांव की ओर लाया गया। ग्रामीण उसे लेकर वर्तमान मंदिर स्थल तक पहुंचे। वहां से जब मेढ़ को आगे गांव की ओर ले जाने की कोशिश की गई तो वह दोबारा वहां से नहीं उठा।
इस घटना के बाद ग्रामीणों ने इसे मां की इच्छा माना और उसी स्थान पर मंदिर स्थापित करने का निर्णय लिया। लोकमान्यता के अनुसार, इसके बाद वहीं मां दुर्गा की पूजा-अर्चना शुरू हुई। धीरे-धीरे यह स्थान मंदिर के रूप में स्थापित हो गया और यहां पूजा की परंपरा चल पड़ी। इसी मान्यता के कारण तेतरी दुर्गा मंदिर का इतिहास काजीकोरिया से बहकर आए मेढ़ की घटना से जुड़ा हुआ है।
वैष्णवी स्वरूप में होती है मां की आराधना
तेतरी दुर्गा मंदिर की खास पहचान यहां होने वाली पूजा-पद्धति है। यहां मां दुर्गा की आराधना वैदिक और तांत्रिक, दोनों विधियों से की जाती है। मंदिर की परंपरा के अनुसार, मां के दरबार में बलि नहीं दी जाती है। श्रद्धालु अपनी मनोकामना लेकर मां के दरबार में आते हैं और संकल्प लेते हैं। मान्यता के अनुसार, मनोकामना पूरी होने पर श्रद्धालु परंपरा के मुताबिक घर ले जाकर बलि देते हैं।
मंदिर में चली आ रही यह पूजा-पद्धति इसे क्षेत्र के दूसरे धार्मिक स्थलों से अलग पहचान देती है। यहां मां के वैष्णवी स्वरूप की पूजा की जाती है। श्रद्धालु पूरी श्रद्धा के साथ मां के दर्शन करते हैं और अपनी मनोकामना लेकर मंदिर पहुंचते हैं।
नवरात्र में नौ दिनों तक होता है कथा का आयोजन
तेतरी दुर्गा मंदिर में शारदीय नवरात्र के दौरान विशेष धार्मिक आयोजन होते हैं। नवरात्र के पहले दिन से ही मंदिर परिसर में श्रीमद्भागवत कथा और रामायण कथा का आयोजन शुरू हो जाता है। यह आयोजन नौ दिनों तक चलता है। इस दौरान श्रद्धालु कथा सुनने और मां की आराधना करने के लिए मंदिर पहुंचते हैं।
नवरात्र के दिनों में मंदिर परिसर में धार्मिक गतिविधियां बढ़ जाती हैं। मां दुर्गा की पूजा-अर्चना के साथ कथा श्रवण की परंपरा भी निभाई जाती है। वर्षों से चली आ रही इस परंपरा के कारण तेतरी दुर्गा मंदिर स्थानीय लोगों की धार्मिक आस्था से गहराई से जुड़ा हुआ है।
करीब 425 साल पुराना बताया जाने वाला यह मंदिर अपने इतिहास, मेढ़ से जुड़ी लोकमान्यता और वैष्णवी पूजा-पद्धति के कारण तेतरी गांव की विशिष्ट पहचान बना हुआ है। यहां पीढ़ियों से मां दुर्गा की पूजा-अर्चना की परंपरा चली आ रही है।















