


प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। अब आर्थिक तंगी किसी गरीब कैदी की आज़ादी में बाधा नहीं बनेगी। जुर्माना नहीं भर पाने या जमानत की शर्तें पूरी करने में असमर्थ बंदियों को सरकार वित्तीय सहायता उपलब्ध कराएगी, ताकि वे केवल गरीबी की वजह से जेल में बंद न रहें।
इसी उद्देश्य से गठित जिलास्तरीय सशक्त समिति की बैठक सोमवार को जिलाधिकारी की अध्यक्षता में हुई। बैठक में विभिन्न जेलों से आए 9 मामलों की समीक्षा की गई। इनमें 4 बंदियों को वित्तीय सहायता के लिए पात्र पाया गया, जबकि 1 मामला अपात्र घोषित किया गया। 4 मामलों में प्रोबेशन पदाधिकारी की जांच रिपोर्ट लंबित रहने के कारण निर्णय फिलहाल टाल दिया गया।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा कि किसी भी पात्र गरीब बंदी को सिर्फ आर्थिक अभाव के कारण जेल में नहीं रहना चाहिए। उन्होंने लंबित जांच रिपोर्ट जल्द उपलब्ध कराने और पात्र बंदियों को समय पर सहायता देने के निर्देश दिए।
रिहाई के बाद नशामुक्ति केंद्र में होगा पुनर्वास
बैठक में एक अहम निर्णय यह भी लिया गया कि मद्यपान निषेध एवं उत्पाद अधिनियम से जुड़े छोटे मामलों में आर्थिक सहायता पाकर रिहा होने वाले बंदियों को सीधे घर नहीं भेजा जाएगा। उन्हें एक महीने तक प्रोबेशन पदाधिकारी की निगरानी में नशामुक्ति केंद्र में रखा जाएगा, ताकि उनका सामाजिक पुनर्वास हो सके और वे दोबारा नशे की लत की ओर न लौटें।
अधिकारियों को समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश
जिलाधिकारी ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि लंबित मामलों की जांच रिपोर्ट निर्धारित समय सीमा में उपलब्ध कराई जाए, जिससे पात्र बंदियों को योजना का लाभ बिना देरी मिल सके।
बैठक में जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश संजय प्रिय, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव रंजीता, पुलिस उपाधीक्षक (सिटी) अजय कुमार झा, विभिन्न जेलों के अधीक्षक तथा अन्य संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।
















