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नवगछिया । बिहपुर प्रखंड के नरकटिया गांव में आयोजित सप्त दिवसीय श्रीमद्भागवत महापुराण के चतुर्थ दिवस पर कथावाचक आचार्य मांगन बाबा ने भक्तों को भगवान वामन के अवतार और राजा बलि के त्याग की प्रेरणादायक कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि किस प्रकार भगवान की वस्तुओं को भगवान को ही समर्पित करने से जीवनमुक्ति की प्राप्ति संभव होती है।

इस अवसर पर आचार्य ने भगवान नरसिंह अवतार, प्रह्लाद चरित्र, भरत चरित्र तथा आचार्य प्रकृति जैसे आध्यात्मिक प्रसंगों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि “भागवत में भक्त शिरोमणि प्रह्लाद का चरित्र अत्यंत अनुपम और दिव्य है। यदि भगवान के प्रति आपकी निष्ठा अगाध है, तो आपको हर स्थान पर ईश्वर की कृपा की अनुभूति होती रहेगी।”

कथा के दौरान आचार्य ने राजा प्रियव्रत और अग्निरथ की गाथा सुनाते हुए बताया कि स्वायंभुव मनु के पुत्र प्रियव्रत ने ब्रह्माजी के आदेश पर गृहस्थ जीवन स्वीकार कर धर्मपूर्वक राज्य किया। सूर्य के प्रकाश के अभाव में उन्होंने अपने रथ से पृथ्वी की सात बार परिक्रमा की, जिससे सात समुद्रों और द्वीपों की रचना हुई।

प्रियव्रत के वंश में जन्मे राजा नाभि के पुत्र भगवान ऋषभदेव को विष्णु का अवतार माना जाता है। उन्होंने आदर्श गृहस्थ जीवन जीते हुए अंततः वैराग्य को अपनाया और पुत्र भरत को राज्य सौंप दिया। भरत ने भी भक्ति मार्ग अपनाया, परंतु एक हिरण के बच्चे से मोहवश अगले जन्म में हिरण बने और फिर जड़ भरत के रूप में जन्म लेकर परम ज्ञान की प्राप्ति की।

कथावाचन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। आयोजन को सफल बनाने में सवीता देवी, नीरज राय, दीपक राय, धीरज राय समेत कई लोगों का योगदान रहा।

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