


नवगछिया। नवगछिया प्रखंड के कोरचक्का गांव में कोसी नदी का बढ़ता जलस्तर एक बार फिर सैकड़ों परिवारों की चिंता का कारण बन गया है। नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ ही गांव के किनारे कटाव शुरू हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते कटाव निरोधी कार्य नहीं कराया गया तो इस वर्ष भी बड़ी संख्या में लोगों को अपना घर-बार छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। वर्तमान में करीब 500 परिवार कटाव के मुहाने पर जीवन गुजार रहे हैं और हर दिन भय के साये में रह रहे हैं।
सामाजिक कार्यकर्ता अमलेंदु अमल ने बताया कि पिछले पांच वर्षों में कोसी नदी के कटाव से करीब 200 परिवार विस्थापित हो चुके हैं। इन परिवारों को अपना पुश्तैनी घर छोड़कर महदत्तपुर, राजेंद्र कॉलोनी, सड़क किनारे तथा रेलवे लाइन के आसपास अस्थायी आश्रय लेकर जीवन यापन करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सबसे दुखद स्थिति यह है कि वर्षों बीत जाने के बावजूद इन विस्थापित परिवारों का अब तक स्थायी पुनर्वास नहीं हो सका है।
ग्रामीणों का कहना है कि मानसून शुरू होते ही कोसी नदी का जलस्तर बढ़ने लगता है और कटाव का खतरा मंडराने लगता है। इस बार भी नदी गांव की ओर तेजी से बढ़ रही है। कटाव की जद में आने वाले परिवारों में सीताराम सिंह, अनिल कुमार सिंह, सुभाष कुमार सिंह, सुबोध कुमार, डब्लू सिंह, जोगी सिंह, सुनील सिंह, हंसदेव सिंह, नरेश सिंह, प्रदीप सिंह, भवेश सिंह और लालू सिंह सहित कई अन्य ग्रामीण शामिल हैं। इन परिवारों का कहना है कि यदि तत्काल सुरक्षा कार्य शुरू नहीं हुआ तो उनका आशियाना कभी भी कोसी नदी में समा सकता है।
ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों पर भी नाराजगी जताई। उनका कहना है कि विधानसभा चुनाव के दौरान वर्तमान ऊर्जा मंत्री एवं स्थानीय विधायक शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल ने गांव का दौरा कर कटाव निरोधी कार्य कराने और गांव को सुरक्षित करने का आश्वासन दिया था। चुनाव जीतने के बाद भी उन्होंने दोबारा गांव पहुंचकर यही भरोसा दिलाया था। ग्रामीणों के अनुसार उस समय जल संसाधन विभाग की टीम ने कटाव प्रभावित क्षेत्र का सर्वेक्षण और मापी भी की थी, लेकिन इसके बाद मामला आगे नहीं बढ़ा। आज तक कोई स्थायी कटाव निरोधी योजना धरातल पर नहीं उतर सकी।
ग्रामीणों का कहना है कि अब मानसून के बीच दीर्घकालीन योजना लागू होना कठिन प्रतीत हो रहा है। ऐसे में प्रशासन को फ्लड फाइटिंग के तहत तत्काल बोल्डर, बालू भरी बोरियां, बांस पाइलिंग एवं अन्य आपात सुरक्षा कार्य शुरू कराना चाहिए, ताकि इस वर्ष गांव को कटाव से बचाया जा सके।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, जल संसाधन विभाग एवं राज्य सरकार से अविलंब हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि यदि शीघ्र प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो सैकड़ों परिवारों का आशियाना उजड़ जाएगा और विस्थापन का दायरा और बढ़ जाएगा। साथ ही उन्होंने पहले से विस्थापित परिवारों के स्थायी पुनर्वास की भी मांग की है।















