


प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। सावन में अजगैवीनाथ धाम सिर्फ आस्था का केंद्र नहीं रहा, इस बार यह रेलवे की क्षमता, इंतजाम और सेवा-तंत्र की भी बड़ी परीक्षा बन गया। एक महीने तक चली कांवड़ियों की भीड़ ने सुल्तानगंज स्टेशन को ऐसा व्यस्त बनाया कि आंकड़े अपने आप कहानी कह रहे हैं। 30 जुलाई से 28 अगस्त तक 17.35 लाख कांवड़ियों ने सुल्तानगंज स्टेशन से ट्रेन पकड़ी। पिछले साल के मुकाबले यह संख्या 2.50 लाख ज्यादा रही। यानी इस बार रेलवे के जरिए अजगैवीनाथ से लौटने वालों की संख्या में खासा इजाफा हुआ।
हर दिन औसतन 57 हजार से ज्यादा कांवड़िए ट्रेन से रवाना:

31 दिनों की मेला अवधि के हिसाब से देखें तो सुल्तानगंज स्टेशन से रोजाना औसतन करीब 56 हजार कांवड़ियों ने रेल यात्रा की। इतनी बड़ी भीड़ को संभालना अपने आप में चुनौती थी।रेलवे ने भीड़ को ट्रेनों में सुरक्षित तरीके से चढ़ाने और उतारने के लिए 1900 अप-डाउन ट्रेनों को पांच मिनट का विशेष ठहराव दिया। इनमें 1098 नियमित मेल-एक्सप्रेस, 450 मेला स्पेशल और 352 पैसेंजर ट्रेनें शामिल थीं। यानी सावन में रेलवे ने सिर्फ अतिरिक्त ट्रेनें नहीं चलाईं, बल्कि नियमित ट्रेनों के संचालन में भी श्रद्धालुओं की भीड़ के हिसाब से समय और ठहराव का प्रबंधन किया।
सुल्तानगंज के बाहर भी दिखा कांवड़ियों का रेल दबाव:
कांवड़ियों की भीड़ सिर्फ अजगैवीनाथ धाम स्टेशन तक सीमित नहीं रही। हंसडीहा से 75 हजार से अधिक और नोनीहाट से 60 हजार से ज्यादा कांवड़ियों ने ट्रेन से अपनी यात्रा शुरू की।
इन स्टेशनों पर भी सुरक्षा, टिकटिंग और यात्री प्रबंधन के विशेष इंतजाम किए गए।
आंकड़ों में सिर्फ भीड़ नहीं, सेवा की कहानी भी:

लाखों श्रद्धालुओं के आने-जाने के बीच स्टेशन परिसर की सफाई भी रेलवे के लिए बड़ी चुनौती रही। पूरे मेला काल में 6.1 टन कचरे का संग्रह और सुरक्षित निस्तारण किया गया। वहीं करीब 20 हजार अस्वस्थ या चोटिल कांवड़ियों को मेडिकल कैंपों में प्राथमिक और आपातकालीन चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई।
डीआरएम ने खुद संभाली निगरानी:
पूरे मेला काल में मालदा मंडल के डीआरएम मनीष कुमार गुप्ता वरिष्ठ अधिकारियों की टीम के साथ यात्री सुविधाओं, सुरक्षा और ट्रेनों के परिचालन की लगातार मॉनिटरिंग करते रहे।
श्रावणी मेले का यह आंकड़ा केवल 17.35 लाख का नहीं है। इसके पीछे 1900 ट्रेनों का अतिरिक्त ठहराव, 450 मेला स्पेशल, 6.1 टन कचरे का निस्तारण और 20 हजार श्रद्धालुओं तक पहुंची चिकित्सा सेवा की पूरी व्यवस्था छिपी है।
अजगैवीनाथ की आस्था ने इस बार रेलवे के सामने भीड़ का रिकॉर्ड रखा और रेलवे ने जवाब में इंतजाम का अपना रिकॉर्ड खड़ा किया।
















