


प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। श्रद्धा और सेवा का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। भगवान शिव के प्रति आस्था रखने वाले शिव भक्त घर परिवार छोड़कर, मित्र मंडली, परिवार के साथ, इन दिनों सेवा कार्य में पूरी निष्ठा के साथ जुटे हुए हैं। कांवड़ यात्रा के दौरान आने-जाने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए जगह-जगह शिव भक्त सेवा शिविरों के माध्यम से सहयोग कर रहे हैं। अकेले भी कई युवक सेवा भाव में लगे हुए हैं। सेवक मदन आर्य कहते हैं पिछले पांच वर्षों से मेडिकल सेवा में लगा हूं। सब भोले की मर्जी है। संत नरहरि सोनार सेवा शिविर के ब्रह्म प्रकाश ठाकुर कहते हैं पिछले पांच वर्षों से पूरी टीम के साथ निःशुल्क सेवा में लगा हुआ हूं।
शिव भक्तों की टोली सुबह से ही सेवा कार्य में सक्रिय हो जाती है। कांवड़ियों के लिए मेडिकल सेवा,पेयजल, शरबत, फल, भोजन और विश्राम जैसी सुविधाओं की व्यवस्था की जा रही है। लंबी यात्रा से थके श्रद्धालुओं को कुछ पल आराम देने के साथ-साथ उनकी जरूरत के अनुसार हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
सेवा में लगे भक्तों का कहना है कि कांवड़ियों की सेवा को वे भगवान शिव की सेवा के समान मानते हैं। उनका उद्देश्य किसी प्रचार या दिखावे से नहीं, बल्कि श्रद्धा और मानवता की भावना से श्रद्धालुओं की मदद करना है। दिनभर गर्मी, भीड़ और लगातार आवाजाही के बीच भी सेवाभावी कार्यकर्ताओं के चेहरे पर उत्साह दिखाई देता है।
सेवा शिविरों में युवाओं के साथ बुजुर्ग और महिलाएं भी अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। कोई श्रद्धालुओं को पानी पिला रहा है तो कोई भोजन वितरण में जुटा है। कई भक्त रास्ते में व्यवस्था बनाए रखने और जरूरतमंद कांवड़ियों को सही दिशा बताने में भी सहयोग कर रहे हैं।
“बोल बम” और “हर हर महादेव” के जयकारों के बीच चल रही यह सेवा यात्रा आस्था को सामाजिक सरोकार से जोड़ रही है। शिव भक्तों का मानना है कि भगवान शिव के प्रति सच्ची श्रद्धा केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरत के समय किसी श्रद्धालु के काम आना भी सबसे बड़ी भक्ति है।
कांवड़ियों की सेवा में जुटे इन शिव भक्तों ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि जहां आस्था होती है, वहां सेवा अपने आप जन्म लेती है। भक्ति, समर्पण और मानवता के इस संगम ने यात्रा मार्ग को केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक सद्भाव और सहयोग का भी केंद्र बना दिया है।
















