


प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। ‘जागो कि बचाना है तुम्हें मानसरोवर, रख ले न कोई छीनकर कैलाश मनोहर…’ इन पंक्तियों के साथ भागलपुर में रविवार को राष्ट्रकवि गोपाल सिंह ‘नेपाली’ की स्मृतियां फिर जीवंत हो उठीं। कविताओं, गीतों और संस्मरणों के बीच साहित्यकारों ने न सिर्फ नेपाली को याद किया, बल्कि उनकी रचनाओं में छिपे राष्ट्रबोध, संवेदना और जागरण के स्वर को भी सामने रखा।

स्थानीय नेताजी सुभाष पथ, आनंदगढ़ (तिलकामांझी) स्थित कवि सुनील कुमार पटेल के ‘पटेल निवास’ में ‘शब्दयात्रा भागलपुर’ के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर अखिल भारतीय साहित्यकार परिषद, भागलपुर की ओर से राष्ट्रकवि गोपाल सिंह ‘नेपाली’ जयंती-मास समारोह आयोजित किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता परिषदाध्यक्ष कविरत्न महेंद्र प्रसाद निशाकर ने की। युवा कवि शेखर खागडी मुख्य अतिथि तथा विनोद कुमार राय विशिष्ट अतिथि रहे। मंच संचालन कवि डॉ. नवीन निकुंज ने किया।
समारोह की शुरुआत सरस्वती वंदना से हुई, जिसे डॉ. जयंत जलद ने प्रस्तुत किया। इसके बाद कार्यक्रम साहित्यिक स्मरण और काव्य-पाठ में बदल गया।
गोपाल सिंह ‘नेपाली’ जयंती-मास अभियान के प्रणेता, वरिष्ठ पत्रकार, कवि एवं लघुकथाकार पारस कुंज ने नेपाली के व्यक्तित्व और कृतित्व पर विस्तार से चर्चा की। इसके बाद डॉ. जयंत जलद ने नेपाली का लोकप्रिय भजन ‘आरती करो, हरिहर की करो, नटवर की’ गाकर वातावरण को भक्तिमय कर दिया। कविरत्न महेंद्र प्रसाद निशाकर ने ‘तुम कल्पना करो, नवीन कल्पना करो’ की प्रस्तुति देकर राष्ट्रकवि को श्रद्धांजलि अर्पित की।
डॉ. नवीन निकुंज ने नेपाली की चर्चित रचना ‘भाई बहन’ की पंक्तियां – ‘तू चिंगारी बनकर उड़ री, जाग-जाग मैं ज्वाल बनूं’ का पाठ किया। उन्होंने नेपाली को ‘वन मैन आर्मी’ के रूप में याद करते हुए उनके साहित्यिक व्यक्तित्व की निर्भीकता और ऊर्जा को रेखांकित किया।

समारोह में शेखर खागडी, विनोद कुमार राय, सुजीत कुमार, सुनील पटेल और देवी दयाल सिन्हा सहित अन्य साहित्यकारों ने भी गोपाल सिंह ‘नेपाली’ से जुड़े प्रसंग और उनकी रचनाओं को साझा किया।
















