


प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। बाबाधाम की धरती आस्था, विश्वास और रहस्यमयी परंपराओं के लिए प्रसिद्ध है। इसी आस्था की कड़ी में सुईया पहाड़ का अपना अलग महत्व है। कभी इस पथरीले रास्ते से कांधे पर कांवर लेकर गुजरना मुश्किल साबित होता था, लेकिन ‘बोल बम’ के जयघोष के आगे सुईया पहाड़ भी मखमली हो जाया करता था। आज इस रास्ते पर सरकारी व्यवस्था बिछ चुकी है।
इस कांवर पथ से गुजरने वाले शिवभक्त अपनी मनोकामना एक अनोखे तरीके से बाबा के सामने रखते हैं। मान्यता है कि श्रद्धा के साथ यहां जितनी मंजिल के पत्थर सजाए जाते हैं, उतनी ही मंजिल का घर बनने की कामना भक्त बाबा से करते हैं।
सुईया पहाड़ पर शिवभक्त छोटे-छोटे पत्थरों को एक-दूसरे के ऊपर रखकर घर जैसी आकृति बनाते नजर आते हैं। कोई एक मंजिल का घर बनाता है, तो कोई दो, तीन या उससे अधिक मंजिल का। इन पत्थरों में सिर्फ मिट्टी और चट्टान नहीं, बल्कि भक्तों के सपने, उम्मीदें और बाबा वैद्यनाथ के प्रति अटूट विश्वास छिपा होता है।

पत्थरों से बनता है सपनों का घर:
शिवभक्त यहां पहुंचकर अपनी मनोकामना बाबा को समर्पित करते हैं और सुईया पहाड़ पर पत्थरों को सजाते हैं। विशेषकर घर बनाने की इच्छा रखने वाले श्रद्धालु अपनी कल्पना के अनुरूप पत्थरों की मंजिल तैयार करते हैं। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि बाबा वैद्यनाथ की कृपा से उनकी मनोकामना पूरी होती है और जीवन में वह शुभ घड़ी आती है, जब उनका अपना आशियाना तैयार होता है।
मुराद पूरी होने पर फिर लौटते हैं भक्त:
इस परंपरा की सबसे भावुक बात यह है कि मनोकामना पूरी होने या नहीं होने के बाद श्रद्धालु अगले साल फिर बाबाधाम पहुंचते हैं। बाबा वैद्यनाथ के दर्शन करने से पहले सुईया पहाड़ पर माथा टेककर अपनी श्रद्धा अर्पित करते हैं। विनती करते हैं। उनके लिए यह सिर्फ एक स्थान नहीं, बल्कि उस विश्वास की निशानी बन जाता है, जिसने उनके सपने को बाबा के दरबार तक पहुंचाया।
आस्था का अनोखा संसार:
सुईया पहाड़ पर बने छोटे-छोटे पत्थरों के ढेर दूर से देखने पर भले ही साधारण लगें, लेकिन हर पत्थर के पीछे एक कहानी और हर बनाई गई मंजिल के पीछे एक सपना जुड़ा है। किसी के लिए यह अपने घर की चाहत है, किसी के लिए परिवार की खुशहाली, तो किसी के लिए जीवन की किसी बड़ी मनोकामना का प्रतीक।
बाबाधाम आने वाले श्रद्धालुओं के लिए सुईया पहाड़ आस्था की उसी अनोखी दुनिया की झलक दिखाता है, जहां पत्थरों से घर बनाए जाते हैं और उन घरों में भक्त अपने सपनों का संसार बसाते हैं। बाबा वैद्यनाथ के प्रति इसी अटूट विश्वास के कारण यह स्थल शिवभक्तों के बीच खास आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
आस्था की यही शक्ति सुईया पहाड़ को खास बनाती है – जहां पत्थर सजाने की परंपरा में भक्त अपने सपनों की नींव रखते हैं और बाबा से उन्हें पूरा करने की प्रार्थना करते हैं।
















