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का हुनर, धान की रोपाई में छात्रों संग उतरे खेत

प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। कृषि शिक्षा केवल कक्षा की चारदीवारी तक सीमित नहीं है, बल्कि खेत ही उसकी सबसे बड़ी प्रयोगशाला है। इसी सोच को साकार करते हुए बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर में प्रैक्टिकल क्रॉप प्रोडक्शन कार्यक्रम के तहत विद्यार्थियों को धान की रोपाई का व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया गया। खास बात यह रही कि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. डी. आर. सिंह स्वयं खेत में उतरे और छात्रों के साथ धान की रोपाई कर उन्हें वैज्ञानिक खेती की बारीकियों से रूबरू कराया।
कार्यक्रम के दौरान कुलपति ने विद्यार्थियों को बताया कि आधुनिक कृषि में केवल सैद्धांतिक ज्ञान पर्याप्त नहीं है। बेहतर उत्पादन के लिए खेत में उतरकर फसल प्रबंधन की तकनीकों को समझना और अपनाना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने धान की सही रोपाई की विधि, पौधों के बीच वैज्ञानिक दूरी बनाए रखने, कतारबद्ध प्रत्यारोपण और समयबद्ध कृषि कार्यों के महत्व पर विस्तार से जानकारी दी।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने भी खेत में ही विद्यार्थियों को आधुनिक धान प्रत्यारोपण तकनीक का प्रशिक्षण दिया। उन्होंने बताया कि उचित दूरी पर रोपाई, संतुलित पौध संख्या और वैज्ञानिक प्रबंधन अपनाने से फसल की गुणवत्ता एवं उत्पादन दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है। छात्रों ने स्वयं खेत में रोपाई कर इन तकनीकों का व्यावहारिक अभ्यास किया।
विद्यार्थियों ने इस प्रशिक्षण को अपने शैक्षणिक जीवन का महत्वपूर्ण अनुभव बताया। उनका कहना था कि कक्षा में पढ़ाए गए सिद्धांतों को खेत में लागू करने से विषय की समझ और अधिक स्पष्ट होती है तथा भविष्य में किसानों के साथ काम करने का आत्मविश्वास भी बढ़ता है।
विश्वविद्यालय का यह प्रयास ‘लर्निंग बाय डूइंग’ की अवधारणा को मजबूत करते हुए विद्यार्थियों को कुशल कृषि पेशेवर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। किताबों से लेकर खेत तक की यह सीख न केवल छात्रों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ रही है, बल्कि उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए भी तैयार कर रही है।

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